रिपोर्ट: रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने से तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग को सालाना ₹3,250 करोड़ तक की बचत संभव
बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक Climate Risk Horizons की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु का टेक्सटाइल उद्योग स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण कर हर वर्ष ₹1,560 करोड़ से ₹3,250 करोड़ तक की लागत बचा सकता है। अध्ययन में पिछले एक दशक के ‘एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज़’ (ASI) के आंकड़ों के आधार पर उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन की स्थिति और संभावनाओं का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि उद्योग पूरी तरह रिन्यूएबल बिजली का उपयोग करे तो उसे सालाना ₹2,320 करोड़ से ₹3,250 करोड़ तक की बचत हो सकती है। अध्ययन में कहा गया है कि ऊर्जा और ईंधन पर बढ़ता खर्च राज्य में टेक्सटाइल उत्पादन की लागत बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बन गया है।
रिपोर्ट के सह-लेखक Rakesh Ranjan के अनुसार, बढ़ती ईंधन लागत तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य का टेक्सटाइल निर्यात 2017 से लगभग 7.4 अरब डॉलर के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। उनके अनुसार, रिन्यूएबल ऊर्जा अपनाने से उद्योग की लागत घटेगी और उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले चार वर्षों में राज्य के टेक्सटाइल क्षेत्र का कुल ऊर्जा व्यय लगभग दोगुना हो गया है। साथ ही, ईंधन लागत और उत्पादन के अनुपात में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अध्ययन के अनुसार, प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में भारत के टेक्सटाइल उद्योग का कार्बन फुटप्रिंट सबसे अधिक है, जो प्रति किलोग्राम टेक्सटाइल पर 12.5 किलोग्राम CO₂e से अधिक है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि रिन्यूएबल ऊर्जा आधारित इलेक्ट्रिक हीटिंग को अपनाकर उद्योग उत्पादन लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी ला सकता है। साथ ही, राज्य सरकार और बिजली नियामक संस्थाओं से विशेषकर MSME इकाइयों के लिए रिन्यूएबल ऊर्जा तक पहुंच आसान बनाने की सिफारिश की गई है।
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