तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग से PLI योजना में निवेश की अपील, निर्यात तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य
तिरुपुर: केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने तमिलनाडु के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग से टेक्निकल टेक्सटाइल तथा मैन-मेड फाइबर (MMF) क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ₹11,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है और उद्योग को इसका उपयोग कर निवेश बढ़ाना चाहिए।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) के एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि सरकार ने टेक्निकल टेक्सटाइल और MMF क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए PLI योजना के नियमों में ढील दी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की नई योजनाओं को उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इनमें मशीनरी, रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इस क्षेत्र के विकास को गति देंगी।
गिरिराज सिंह ने उद्योग जगत से उन राज्यों में भी निवेश करने का आग्रह किया, जहां पर्याप्त श्रमबल उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश का वार्षिक रेशम उत्पादन 26,000 टन था, जो अब बढ़कर 43,000 टन हो गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे 60,000 टन तक पहुंचाना है। उन्होंने रेशम और अन्य फाइबर के मिश्रण से बने वस्त्रों के निर्यात को बढ़ाने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि वस्त्र मंत्रालय लगातार नई योजनाएं लागू कर रहा है और सभी सात PM MITRA पार्क अब संचालित हो चुके हैं। वहीं, TEA के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यन ने टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन (TEEM) को जल्द लागू करने तथा कर और लेवी से जुड़ी राहत को तीन वर्ष और बढ़ाने की मांग की।
बाद में केंद्रीय मंत्री ने कोयंबटूर स्थित साउथ इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (SITRA) में कपास और कपास आधारित उत्पादों के लिए स्थापित GM टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया। हाल ही में NABL से मान्यता प्राप्त इस लैब से वैश्विक कपास व्यापार में गुणवत्ता जांच, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग से राज्य के वस्त्र निर्यात को तीन गुना बढ़ाने और निटिंग, वीविंग तथा प्रोसेसिंग क्षेत्रों के लिए स्वदेशी मशीनरी निर्माण में निवेश बढ़ाने का भी आह्वान किया।