कपास की खेती से बढ़िया कमाई: कृषि विभाग की सलाह से पाएं बंपर उत्पादन
खैरथल-तिजारा जिले में कपास की बुवाई 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और मई के अंतिम सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है। इस वर्ष कृषि विभाग ने 6000 हेक्टेयर में कपास की खेती का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 10,000 हेक्टेयर लक्ष्य से कम है। पिछले सीजन में केवल 8594 हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। क्षेत्र में कपास का रकबा घटने के पीछे मुख्य कारण हैं—बाजरा और प्याज के बेहतर दाम, पानी की कमी और फसलों में बढ़ते रोग।
अच्छी पैदावार के लिए जरूरी तैयारी
बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को उन्नत किस्म के बीज चुनने और बुवाई से पहले उनका उपचार करने की सलाह दी गई है। खेत की गहरी जुताई करना जरूरी है ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़े। साथ ही, देशी गोबर की खाद का उपयोग फसल के लिए लाभकारी रहता है।
यदि खेत में दीमक की समस्या हो, तो प्रति किलो बीज को 10 मि.ली. क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी और 10 मि.ली. पानी के मिश्रण से उपचारित करें। उपचार के बाद बीज को 30–40 मिनट छाया में सुखाकर ही बुवाई करें।
उन्नत बुवाई तकनीक और सिंचाई
कृषि विभाग ने डिबलिंग विधि से बुवाई करने की सलाह दी है:
कतार से कतार दूरी: 108 सेमी
पौधे से पौधे की दूरी: 60 सेमी
पूर्व से पश्चिम दिशा में कतारें लगाने से उत्तर-दक्षिण की तुलना में अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बताई गई है। पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 15 दिन बाद करनी चाहिए।
उर्वरक और कीट प्रबंधन
उर्वरक: प्रति बीघा 37.5 किग्रा नत्रजन, साथ में 10 किग्रा पोटाश और फॉस्फोरस बुवाई के समय दें।
दीमक नियंत्रण: 4–5 मि.ली. क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास डालें।
रोग नियंत्रण: ब्लाइट रोग के लिए 30–32 ग्राम मैंकोजेब को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
रस चूसक कीट: जेसिड और एफिड नियंत्रण के लिए कुनाल फोर्स 25 ईसी 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें।
इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान कपास की फसल में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं।