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महाराष्ट्र में कपास रकबा 10–15% बढ़ने की संभावना

2026-06-08 12:59:07
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महाराष्ट्र में खरीफ 2026-27 में कपास का रकबा बढ़ने की उम्मीद


महाराष्ट्र में खरीफ 2026-27 सीजन के दौरान कपास की खेती का रकबा 10-15 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कपास की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के कारण किसान, विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में, सोयाबीन के बजाय कपास की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।


अधिकारियों का कहना है कि बेहतर बाजार मांग और अधिक लाभ की संभावना किसानों को कपास की ओर आकर्षित कर रही है। पिछले सीजन में सोयाबीन उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। 5,328 रुपये प्रति क्विंटल के MSP के मुकाबले कई किसानों को सोयाबीन 4,000-4,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचनी पड़ी। इसके विपरीत, अप्रैल और मई में कपास की कीमतें 9,000 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं, जो MSP से काफी अधिक थीं।


यवतमाल के किसान अशोक भुताडा ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष 16 एकड़ में कपास बोई थी, जबकि इस बार वे 20-21 एकड़ में कपास की खेती करने की योजना बना रहे हैं। उनके अनुसार, बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा के बीच सोयाबीन की तुलना में कपास अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है।


कृषि विभाग का मानना है कि यह रुझान विदर्भ और मराठवाड़ा के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने किसानों को केवल मौजूदा ऊंची कीमतों के आधार पर निर्णय लेने से सावधान किया है। किसान नेता Vijay Jawandhia का कहना है कि कपास की कीमतों में मौजूदा तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों से जुड़ी है और यह जरूरी नहीं कि फसल बाजार में आने तक कीमतें इसी स्तर पर बनी रहें।


कपास की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद इससे जुड़े जोखिम भी बने हुए हैं। 2025-26 में राज्य में कपास का उत्पादन लगभग 47 प्रतिशत घटकर 51 लाख मीट्रिक टन रह गया था। इसका प्रमुख कारण अत्यधिक और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि रहा। आगामी सीजन के लिए भी कई जिलों में कम वर्षा की आशंका जताई जा रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए केवल ऊंची बाजार कीमतें पर्याप्त नहीं हैं। प्रभावी खरीद व्यवस्था, उचित मूल्य और बेहतर कृषि मार्गदर्शन ही किसानों को वास्तविक आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।


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