पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का खतरा बढ़ा

2026-07-13 11:49:01
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पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का बढ़ा खतरा

पंजाब के कपास उत्पादक जिलों में व्हाइटफ्लाई (सफेद मक्खी) और पिंक बॉलवर्म (गुलाबी सुंडी) के शुरुआती हमले के संकेत मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दोनों कीटों का प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा (इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल-ETL) से नीचे है, लेकिन अगले 15–20 दिनों तक खेतों की नियमित निगरानी जरूरी होगी।

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कपास का रकबा घटकर करीब 80,000 हेक्टेयर रह गया है, जो दक्षिण मालवा क्षेत्र में अब तक का सबसे कम क्षेत्र माना जा रहा है। जुलाई में बारिश की कमी, लगातार गर्मी और बढ़ी हुई उमस ने कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दी हैं।

स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य कृषि विभाग, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की टीमें दक्षिण-पश्चिम पंजाब के जिलों में लगातार सर्वेक्षण कर रही हैं। वैज्ञानिक खेतों में कीटों की संख्या पर नजर रखने के साथ किसानों को बचाव और प्रबंधन संबंधी सलाह भी दे रहे हैं।

फाजिल्का जिले, जहां इस सीजन में पंजाब के कुल कपास क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा (करीब 40,000 हेक्टेयर) है, वहां व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म दोनों के मामले सामने आए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी कुलवंत सिंह ने बताया कि कुछ खेतों में व्हाइटफ्लाई का स्पष्ट हमला देखा गया है, जबकि कुछ स्थानों पर पिंक बॉलवर्म भी मिला है। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में है।

मुक्तसर जिले में किसानों को शुरुआती अवस्था में व्हाइटफ्लाई के नियंत्रण के लिए नीम आधारित जैविक कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी गई है। वहीं बठिंडा में कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ाते हुए जोधपुर रोमाना और यात्री गांवों को व्हाइटफ्लाई के हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया है। कुछ फेरोमोन ट्रैप में पिंक बॉलवर्म की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।

PAU के मुख्य कीट विज्ञानी विजय कुमार ने कहा कि फिलहाल फसल को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो अगले दो सप्ताह में कीटों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बारिश होने पर व्हाइटफ्लाई की आबादी कम हो सकती है। विशेषज्ञों ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने, रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग न करने और किसी भी छिड़काव से पहले कृषि अधिकारियों की सलाह लेने की अपील की है।


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