महाराष्ट्र: पुसद तालुका में 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ खेती की तैयारी
खरीफ मौसम के नजदीक आते ही कृषि विभाग ने यवतमाल जिले के पुसद तालुका के लिए वर्ष 2026–27 की खरीफ फसल योजना तैयार कर ली है। विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष तालुका में लगभग 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई होने की संभावना है। इस बार कपास के रकबे में बढ़ोतरी और सोयाबीन के क्षेत्र में हल्की कमी का अनुमान जताया गया है।
योजना के अनुसार सबसे अधिक 31,890 हेक्टेयर में कपास की खेती प्रस्तावित है। इसके बाद लगभग 28,910 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई का अनुमान है। अन्य फसलों में 8,110 हेक्टेयर में अरहर, 1,890 हेक्टेयर में हल्दी, 610 हेक्टेयर में खरीफ ज्वार, 445 हेक्टेयर में मूंग और 350 हेक्टेयर में उड़द की खेती प्रस्तावित है।
तालुका में कुल 39,768 पंजीकृत किसान खाताधारक हैं, जिनमें 16,229 सीमांत किसान, 9,690 छोटे किसान और 13,839 बड़े भूधारक किसान शामिल हैं।
कृषि विभाग के अनुसार इस खरीफ सीजन में कपास के लगभग 1,59,450 बीज पैकेटों की आवश्यकता होगी, जबकि सोयाबीन बीज की मांग 8,673 क्विंटल आंकी गई है। हालांकि किसानों के पास पहले से ही लगभग 28,210 क्विंटल सोयाबीन बीज उपलब्ध बताया गया है।
उर्वरक की कुल आवश्यकता 22,863 मीट्रिक टन अनुमानित की गई है, जिसमें 9,509 टन मिश्रित उर्वरक, 5,802 टन यूरिया, 2,304 टन डीएपी और 4,266 टन एसएसपी शामिल हैं।
कृषि विभाग के अमोल अघाव ने किसानों को सलाह दी है कि वे बिना बीज उपचार के बुवाई न करें, क्योंकि हाल के वर्षों में मिट्टी जनित फफूंद रोगों का प्रकोप बढ़ा है। साथ ही उन्होंने यह भी अपील की है कि किसान कम से कम 100 मिमी वर्षा होने के बाद ही बुवाई करें और जल्दबाजी से बचें।
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