महाराष्ट्र-गुजरात में बारिश की मार, कपास फसल संकट में
जलगांव (महाराष्ट्र)/नसवाड़ी (गुजरात): लगातार हो रही भारी बारिश ने महाराष्ट्र और गुजरात के कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में जलभराव के कारण कपास की फसल में जड़ सड़न (रूट रॉट) बीमारी तेजी से फैल रही है, जबकि गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तालुका में नदी में आई बाढ़ से लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। इससे कपास के साथ-साथ मक्का, अरहर और सब्जियों की फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों का कहना है कि बाढ़ और बीमारियों के दोहरे संकट से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जलगांव जिले में 30 और 31 जुलाई को हुई भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की फसल प्रभावित हुई। कई खेतों में अब भी पानी भरा होने के कारण पौधों की वृद्धि रुक गई है। जलभराव से जड़ सड़न बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और कई स्थानों पर हरे-भरे दिखने वाले कपास के पौधे अचानक मुरझाकर सूख रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के जलगांव स्थित कॉटन रिसर्च सेंटर के अनुसार, यह बीमारी देसी और अमेरिकन दोनों प्रकार की कपास को प्रभावित करती है। लंबे समय तक मिट्टी में पानी भरा रहने से बीमारी फैलाने वाला फफूंद तेजी से विकसित होता है और बारिश या सिंचाई के पानी के माध्यम से पूरे खेत में फैल जाता है। संक्रमित पौधों की जड़ें सड़ जाती हैं, छाल आसानी से निकल जाती है और पौधे अचानक मुरझाकर गिर जाते हैं। जड़ों का निचला हिस्सा पहले पीला और बाद में काला पड़ जाता है, जो इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करें, संक्रमित पौधों को हटाकर नष्ट करें तथा 100 लीटर पानी में 700 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड घोलकर पौधों के आधार (जड़ क्षेत्र) में उपचार करें। आवश्यकता पड़ने पर पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाने की भी सलाह दी गई है।
उधर गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तालुका के खोडिया गांव में लगातार बारिश के बाद मेन नदी में आई बाढ़ ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज बहाव के कारण नदी का पानी खेतों में घुस गया और लगभग 100 एकड़ भूमि में लगी कपास, मक्का, अरहर तथा सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। खेतों में करीब दो फीट गाद जमा होने से फसलें दब गईं और किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो गई।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश, जलभराव, बाढ़ और जड़ सड़न जैसी बीमारियों का बढ़ता प्रकोप इस सीजन के कपास उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि समय पर जल निकासी, रोग प्रबंधन और सरकारी सहायता से किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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