CITI, ICAC और Merago की साझेदारी से कपास किसानों को मिलेगा कार्बन क्रेडिट का लाभ
चेन्नई: भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (CITI) ने इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (ICAC) और टेक्नोलॉजी कंपनी Merago Inc. के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य पुनर्योजी (Regenerative) कृषि पद्धतियों पर आधारित कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं का विकास करना है। इस पहल से भारत में टिकाऊ कपास उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कपास किसानों को कार्बन क्रेडिट के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
समझौते के तहत ICAC परियोजना का प्रमुख तकनीकी साझेदार होगा। संस्था किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण, तकनीकी विशेषज्ञता और आवश्यक परामर्श प्रदान करेगी। वहीं, CITI–Cotton Development and Research Association (CITI-CDRA) तथा उससे जुड़े किसान मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) बढ़ाने के लिए पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाएंगे।
परियोजना के अंतर्गत कृषि अवशेषों (बायोमास) से बायोचार और कम्पोस्ट तैयार कर उनका उपयोग कपास के खेतों में किया जाएगा। इन तकनीकों से मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में सुधार होगा, कार्बन भंडारण बढ़ेगा तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, दीर्घकाल में कपास की उत्पादकता बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Merago Inc. परियोजना के क्रियान्वयन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी तथा कार्बन एसेट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभालेगी। दूसरी ओर, CITI-CDRA किसानों को परियोजना से जोड़ने, प्रशिक्षण देने और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी कार्यान्वयन का नेतृत्व करेगा।
परियोजना के तहत उत्पन्न कार्बन क्रेडिट का विकास, सत्यापन (Verification) और हस्तांतरण पेरिस समझौते के अनुच्छेद-6 (Article 6), भारत के लागू कानूनों तथा कार्बन बाजार से संबंधित नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। सत्यापित उत्सर्जन में कमी और कार्बन हटाने से जुड़े सभी रिकॉर्ड राष्ट्रीय कार्बन रजिस्ट्री में दर्ज किए जाएंगे।
नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद सत्यापित कार्बन हटाने के एक निर्धारित हिस्से को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों में हस्तांतरण योग्य (Transferable) कार्बन क्रेडिट के रूप में प्रमाणित किया जाएगा। Merago Inc. इन कार्बन क्रेडिट के व्यावसायीकरण का प्रबंधन करेगी, जबकि पूर्व निर्धारित राजस्व-साझाकरण व्यवस्था के अनुसार प्राप्त आय CITI, ICAC और परियोजना में भाग लेने वाले किसानों के बीच वितरित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत विकसित कर सकती है। साथ ही, इससे भारत में जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कपास उत्पादन में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य कपास उत्पादक राज्यों में भी व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है, जिससे अधिक संख्या में किसानों को कार्बन बाजार से जुड़ने और अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
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