कच्चे कपास की ऊंची लागत और बेहतर मांग से भारतीय सूती धागा बाजार को समर्थन
भारतीय सूती धागा बाजार में कच्चे कपास की ऊंची लागत और बुनाई उद्योग की मांग में सुधार के कारण मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर भारत की मंडियों में कपास की सीमित आवक और कताई मिलों की बढ़ती उत्पादन लागत के कारण सूती धागे की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, विभिन्न प्रकार के धागों की मांग में अंतर बना हुआ है।
कच्चे कपास की कीमतों का असर
कच्चे कपास की कीमतों में मजबूती से कताई मिलों की उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है। इसके चलते मिलें सूती धागे की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर अतिरिक्त लागत की भरपाई करने का प्रयास कर रही हैं। विशेष रूप से बुनाई उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख धागों की मांग बेहतर बताई जा रही है। हालांकि, सामान्य और कम मांग वाले धागों के कारोबार में कीमतों को लेकर मोलभाव जारी है।
कपास की आवक और बाजार की मांग
उत्तर भारत की कपास मंडियों में दैनिक आवक सीमित रहने की खबरों के बीच कताई मिलों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता महत्वपूर्ण बनी हुई है। दूसरी ओर, बुनाई इकाइयों की खरीदारी में सुधार से सूती धागा बाजार को समर्थन मिल रहा है।
हालांकि, निर्यात मांग अभी भी चुनिंदा बाजारों तक सीमित बताई जा रही है। घरेलू खरीदार भी बड़ी मात्रा में अग्रिम खरीदारी करने के बजाय अपनी तत्काल जरूरत के अनुसार स्टॉक बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
नई फसल और सरकारी खरीद पर नजर
अक्टूबर के दौरान कपास की नई फसल की कटाई और मंडियों में आवक की गति बाजार की आगामी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की स्थिति भी घरेलू कपास बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
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