कस्तूरी कॉटन की गुणवत्ता पर जोर, हर गांठ पर ₹500 प्रोत्साहन
बड़वानी: भारतीय कपास को बेहतर गुणवत्ता और ब्रांड पहचान दिलाने के लिए जिले में कस्तूरी कॉटन भारत को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। मंगलवार, 29 सितंबर को अंजड़ कृषि उपज मंडी परिसर में कस्तूरी कॉटन भारत के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें किसानों को कपास की गुणवत्ता, साफ-सफाई, भंडारण और परिवहन से जुड़ी जानकारी दी गई।
कस्तूरी कॉटन भारत कोई नई कपास किस्म या नया बीज नहीं है। यह भारतीय कपास की ब्रांडिंग, प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी से जुड़ी पहल है। कार्यशाला में बताया गया कि गुणवत्तायुक्त कपास की प्रत्येक गांठ (बेल) पर ₹500 प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार कस्तूरी कॉटन भारत का उद्देश्य भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक बाजार में उसकी पहचान मजबूत करना है।
CITI-CDRA के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर नितिन तोमर ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रमाणित बीज अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। केवल कम कीमत या पैकेट की तस्वीर देखकर बीज का चयन नहीं करना चाहिए। मिट्टी की जांच, उचित पोषण, जैविक खाद और प्राकृतिक फसल सुरक्षा पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई। HDPS तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया।
कपास की चुनाई के दौरान मिट्टी, पत्तियां, प्लास्टिक, कचरा और अन्य बाहरी सामग्री कपास में नहीं मिलनी चाहिए। पैकिंग, भंडारण और परिवहन के दौरान भी सफाई बनाए रखना जरूरी है। इससे कपास की गुणवत्ता को खेत से जिनिंग तक बनाए रखने में मदद मिलती है।
अंजड़ की कार्यशाला में रेशे की लंबाई, ट्रैश, नमी, मजबूती, यूनिफॉर्मिटी इंडेक्स और माइक्रोनेयर जैसे गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी गई। इन जानकारियों को कार्यशाला में बताए गए गुणवत्ता मानकों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
वहीं, आधिकारिक कस्तूरी कॉटन प्रमाणन व्यवस्था में 28 मिमी या अधिक लंबाई वाली लॉन्ग-स्टेपल कपास और 35 मिमी या अधिक लंबाई वाली ELS कपास शामिल है। प्रत्येक प्रमाणित गांठ की पहचान के लिए QR आधारित प्रमाणन और ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कपास की एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित होती है।
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