भारत में कपास की बुआई पिछली बार से धीमी, गुजरात और मध्य भारत से बढ़ीं उम्मीदें
भारत में 2026-27 कपास सीज़न की शुरुआत धीमी रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही है, हालांकि गुजरात और मध्य भारत से मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने उद्योग की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
8 जून तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में कपास की बुआई 7.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 9.72 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस बार बुआई का रकबा 2.21 लाख हेक्टेयर कम है। प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में मॉनसून की शुरुआती बारिश के बावजूद बुआई की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
उत्तर भारत में कपास के रकबे में गिरावट की आशंका है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में इस वर्ष कुल रकबा करीब 20 प्रतिशत तक घट सकता है। पिछले कुछ वर्षों में कीट प्रकोप और फसल नुकसान के कारण कई किसान कपास छोड़कर बाजरा, मक्का और धान जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। पंजाब में जून की शुरुआत तक केवल 70,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई, जबकि लक्ष्य 1.25 लाख हेक्टेयर का था। हरियाणा में बुआई बढ़कर 3.07 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, लेकिन यह सामान्य स्तर से कम रहने की संभावना है।
इसके विपरीत, गुजरात में कपास की बुआई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार, 8 जून तक कपास का रकबा 93,499 हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 34,011 हेक्टेयर से काफी अधिक है। बेहतर कीमतों और किसानों की बढ़ती रुचि को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) का अनुमान है कि इस सीज़न में मध्य भारत में कपास का रकबा लगभग 15 प्रतिशत बढ़ सकता है और देश का कुल क्षेत्रफल 130 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंच सकता है। MSP में ₹557 प्रति क्विंटल की वृद्धि भी किसानों को कपास की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। अब आने वाले सप्ताहों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य भारत में बुआई की प्रगति यह तय करेगी कि देश इस अनुमान के कितने करीब पहुंच पाता है।