मक्का से कपास और सोयाबीन की ओर बढ़ सकता है किसानों का रुझान
संभावित अल-नीनो प्रभाव और सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान के बीच खरीफ सीजन में किसानों की फसल चयन रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। क्रिसिल की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्यों में किसान मौसम, लाभप्रदता और बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में मक्का उत्पादक किसानों का रुझान सोयाबीन की ओर बढ़ सकता है। वहीं, देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में मक्का और सोयाबीन के कुछ रकबे के कपास की ओर स्थानांतरित होने की संभावना जताई गई है, जिससे राज्य में कपास का रकबा बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुख्य लेखक पुशन शर्मा के अनुसार, मक्का के कुल रकबे में कमी आने की संभावना है, लेकिन फसल परिवर्तन का स्वरूप राज्यों के अनुसार अलग-अलग रहेगा। किसान केवल वर्षा के पूर्वानुमान पर ही नहीं, बल्कि फसलों की सापेक्ष लाभप्रदता, खरीद सहायता और मौजूदा बाजार परिस्थितियों को भी ध्यान में रखेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसम के शुरुआती चरण में अधिक तापमान और असमान वर्षा के कारण कपास और सोयाबीन जैसी फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम बना रहेगा।
हालांकि, देश के जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर बना हुआ है, जिससे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में समय पर खेतों की तैयारी और बुवाई कार्य को सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके बावजूद खरीफ फसलों की पैदावार काफी हद तक मानसून के वितरण, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा उर्वरकों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम बारिश की आशंका के बीच किसान जोखिम और संभावित लाभ को ध्यान में रखते हुए फसल चयन करेंगे, जिसके चलते कुछ क्षेत्रों में मक्का के स्थान पर कपास और सोयाबीन का रकबा बढ़ सकता है।
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