हरियाणा सरकार ने देसी कपास की बुवाई के अंतर्गत आने वाली योजना का बजट बढ़ा दिया है। किसानों को प्रति एकड़ चार हजार रुपए प्रति एकड़ लाभ मिलेगा। अब देसी कपास की बुवाई करने वाले सिरसा सहित प्रदेशभर के किसानों को फायदा होगा। किसानों को पहले तीन हजार रुपए मिलते थे। इससे किसानों में देसी कपास के प्रति रूचि बढ़ेगी।
इसका सीधा-सीधा फायदा सिरसा के करीब 7 हजार किसानों को मिलेगा, जो कृषि विभाग के रजिस्टर्ड हैं। इन किसानों को योजना का लाभ मिलता है। देसी कपास में सिरसा को हब माना जाता है, क्योंकि यहां शुरू से प्रदेश में सबसे अधिक कॉटन होती है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से कॉटन का केंद्रीय अनुसंधान केंद्र का मुख्यालय भी यहीं पर बनाया हुआ है। मगर पिछले कुछ सालों से कॉटन में गुलाबी सुंडी व अन्य बीमारी आने से पैदावार कम होने के कारण किसानों की रूचि कम हो गई है।
इसके चलते अधिकांश किसानों ने कॉटन की बुआई करना छोड़ दिया है। अब कॉटन के बजाय धान की खेती करने लगे हैं। एक समय था, जब सिरसा जिला कॉटन उत्पादन में सबसे अव्वल था, लेकिन अब गांवों में कॉटन की ना के बराबर खेती होने लगी है। इस समय जिले में करीब ऐसे में सरकार किसानों में कॉटन के प्रति मोटिवेट करना चाहती है, ताकि कॉटन का रकबा बढ़ सकें।
विधायक गोकुल सेतिया ने सदन में उठाया था मुद्दा
सिरसा विस सीट से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने देसी कपास का रकब घटने का मुद्दा हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में उठाया था। विधायक सेतिया ने देसी कपास बुवाई के लिए लाभांवित योजना का दायरा बढ़ाने की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने विधानसभा बजट सत्र में देसी कपास का मुद्दा उठाने के बाद इस योजना का दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया।
पंचायत मंत्री ने दिया था जवाब
इस पर कृषि एवं पंचायत मंत्री श्याम सिंह राणा ने सदन में जवाब दिया था कि इस पर प्रोत्साहन राशि तीन हजार रुपए दी जाती है। विधायक सेतिया ने मांग रखी थी कि हमारा बीज बहुत पुराना है। विदेशों में फसल ठीक होती है, ऐसा ही अच्छा बीज हमारे यहां हो। बाजरा फसल बुआई की तरह देसी कपास बुवाई करने वाले किसानों को बोनस दिया जाए। नए बीज को विकसित किया जाए।
भावांतर में शामिल करने से किसानों में बढ़ेगी रूचि : डीडीए
इस मामले में कृषि विभाग से डीडीए सुखबीर सिंह का कहना है कि सिरसा जिले में करीब 7 हजार लाभार्भी किसान है, जिनको योजना के तहत देसी कॉटन बुवाई पर तीन हजार रुपए विभाग द्वारा दिए जाते हैं। करीब 17 हजार देसी कपास का रकबा है। विभाग की ओर से सरकार से अनुरोध किया गया था कि यह कॉटन फसल कर्मिशियल में इस्तेमाल होती है।
इसलिए इस फसल को भावांतर योजना में बिकने वाली बाजरा की तरह फसल में लिया जाए, ताकि किसान को भावांतर योजना का लाभ मिल सके। वरना किसानों में रूचि घट रही है। अगर किसान को प्राइवेट में भाव कम मिले तो उसे भावांतर का लाभ मिल सके। इससे रकबा बढ़ेगा। अच्छी बात है कि सरकार ने योजना में किसानों को मिलने वाली योजना में एक हजार रुपए राशि बढ़ा दी है।
देसी कपास की खेती पर प्रोत्साहन राशि ₹3,000 की बजाय ₹4,000 प्रति एकड़ होगी।
धान छोड़कर दाल-तिलहन-कपास उगाने पर ₹2,000 प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस ।
10 मंडियों में ऑर्गेनिक उत्पादन के लिए जगह मिलेगी।
सीएम बागवानी बीमा योजना में फल व सब्जियों-मसालों पर मुआवजा बढ़ेगा।
सिंगल बड तकनीक से गन्ना बिजाई पर ₹5,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि।
मधुमक्खी पालन भी मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में शामिल होगी।
प्रदेश में 7 वेटरनेरी डिस्पेंसरी और 4 गवर्नमेंट वेटरनेरी अस्पताल खुलेंगे।