ईरान-इजरायल युद्ध का बड़वानी के कपास व्यापार पर असर, निर्यात ठप होने की आशंका
ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के कपास व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में अनिश्चितता बढ़ने से आयात-निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है।
बड़वानी के कपास व्यापारी और कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल तायल के अनुसार भारत का कपास व्यापार काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय आयात-निर्यात पर निर्भर करता है। भारत लंबी रेशे वाली कपास अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयात करता है।
समुद्री मार्ग प्रभावित होने से बढ़ेगी परिवहन लागत
जिले के स्थानीय कपास व्यापारी और कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल तायल ने बताया कि मौजूदा युद्ध की स्थिति में अमेरिका सहित कई देश किसी न किसी रूप में इसमें शामिल हैं, जिससे वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। ईरान के पास स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, खासकर हॉर्मुज की खाड़ी, बेहद संवेदनशील हो गई है।
यदि यह मार्ग प्रभावित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और व्यापार महंगा हो जाएगा।
कपास और वस्त्र उद्योग पर बढ़ सकता है दबाव
भारत अमेरिका से बड़ी मात्रा में कपास आयात करता है, जबकि यहां तैयार होने वाले कपड़े और रेडीमेड गारमेंट यूरोप के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन युद्ध के कारण यूरोप के बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ गई है।
यदि निर्यात बाधित होता है तो तैयार माल देश के भीतर ही रुक सकता है, जिससे बाजार में माल का दबाव बढ़ेगा और कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ढुलाई महंगी, कपड़ों की कीमतों में 30-35% तक बढ़ोतरी
व्यापारियों का कहना है कि हॉर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और युद्ध जोखिम बीमा महंगा होने से ढुलाई लागत बढ़ गई है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण तैयार कपड़ों की कीमतों में भी लगभग 30-35 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिल रही है और निर्यात लगभग ठप हो गया है।
व्यापारियों ने कहा कि जल्द शांति स्थापित होना जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सामान्य हो सके और कपास व वस्त्र उद्योग को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।