बजट 2026–27 में कपड़ा क्षेत्र को विकास और रोजगार का प्रमुख इंजन बनाने पर जोर
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और दीर्घकालिक सुधारों के प्रति सरकार के आत्मविश्वास को दर्शाता है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जहां 7.2 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर और ₹12.21 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय के साथ बुनियादी ढांचे और विनिर्माण आधारित विकास को गति दी गई है।
बजट में कपड़ा क्षेत्र को श्रम-गहन विनिर्माण के माध्यम से समावेशी विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का मुख्य स्तंभ बनाया गया है। अब तक कल्याणकारी दृष्टिकोण से देखे जाने वाले इस क्षेत्र को प्रतिस्पर्धात्मकता, पैमाने और निर्यात क्षमता से जोड़ते हुए राष्ट्रीय औद्योगिक रणनीति के केंद्र में रखा गया है। वर्तमान में यह क्षेत्र जीडीपी में लगभग 2.3 प्रतिशत का योगदान देता है और 5.2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
सरकार द्वारा किए गए 18 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारत को लगभग 466 अरब डॉलर के वैश्विक कपड़ा बाजारों तक तरजीही पहुंच मिली है। अमेरिका सहित प्रमुख बाजारों में बेहतर पहुंच से कपड़ा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
घरेलू स्तर पर बजट 2026 गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों में ढील, जीएसटी सुधार और उलटी शुल्क संरचना के समाधान के माध्यम से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर केंद्रित है। राष्ट्रीय फाइबर योजना के तहत कपास, मानव-निर्मित और नए जमाने के फाइबर की उपलब्धता को मजबूत किया जाएगा, जिससे कच्चे माल की लागत में स्थिरता आएगी और निर्यात मूल्य निर्धारण में निश्चितता बढ़ेगी।
उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए देशभर में 200 कपड़ा औद्योगिक क्लस्टरों को उन्नत करने की घोषणा की गई है। कपड़ा उद्योग प्रति निवेश अधिक रोजगार सृजित करता है और क्लस्टर आधारित विस्तार के जरिए अगले पांच वर्षों में 2 से 3 करोड़ नई आजीविकाओं के सृजन का अनुमान है। इसके साथ ही, समर्थ 2.0 योजना के तहत 15 लाख कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
बजट में एमएसएमई की तरलता समस्या को दूर करने के लिए ₹10,000 करोड़ के एसएमई विकास कोष, बेहतर टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म और तेज़ भुगतान तंत्र की व्यवस्था की गई है। हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों को भी सुधार प्रक्रिया में शामिल करते हुए, स्थिरता, कौशल विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच को बढ़ावा दिया गया है, जिससे भारत के कपड़ा पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।