खरगोन में शुरू हुई ‘व्हाइट गोल्ड’ की तैयारी, खेती में सही तकनीक पर जोर
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं. प्रदेश के सबसे बड़े कपास उत्पादक जिले के रूप में पहचान रखने वाला खरगोन हर साल लाखों क्विंटल कपास उत्पादन करता है. जिले की अर्थव्यवस्था में कपास की अहम भूमिका होने के कारण किसानों की उम्मीदें भी इस फसल से जुड़ी रहती हैं. हालांकि हर सीजन में किसान अलग-अलग कपास वैरायटी को लेकर असमंजस में रहते हैं और किसी एक विशेष किस्म की ओर तेजी से आकर्षित हो जाते हैं. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहतर उत्पादन के लिए केवल वैरायटी नहीं, बल्कि सही खेती तकनीक और फसल प्रबंधन अधिक महत्वपूर्ण है.
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह के अनुसार जिले में खरीफ सीजन के दौरान बीटी कॉटन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. “सफेद सोना” कहलाने वाली इस फसल की देश और विदेश दोनों बाजारों में अच्छी मांग रहती है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध लगभग सभी बीटी-2 कपास वैरायटी अच्छी उत्पादन क्षमता रखती हैं, इसलिए किसानों को किसी एक किस्म के पीछे भागने की जरूरत नहीं है.
विशेषज्ञों का कहना है कि खेत की सही तैयारी अच्छी पैदावार की सबसे बड़ी कुंजी है. गहरी जुताई, समय पर बुवाई और संतुलित उर्वरकों का उपयोग उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, ताकि फसल को सही पोषण मिले और लागत भी नियंत्रित रहे.
कपास की फसल में जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण को भी बेहद जरूरी बताया गया है. जरूरत के अनुसार सिंचाई करना, खेत में जलभराव रोकना और समय पर कीटनाशक छिड़काव फसल को सुरक्षित रखने में मदद करता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसान आधुनिक तकनीकों और नियमित निगरानी को अपनाएं तो किसी भी अच्छी वैरायटी से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है.
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