भारतीय बजट से कपास क्षेत्र को नई बीज तकनीक की उम्मीद: अतुल गणात्रा
Atul Ganatra, चेयरमैन, SRCPL Group ने CNBC Bajar पर दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत में कपास की उत्पादकता बेहद कम है और इसका सबसे बड़ा कारण पुरानी बीज तकनीक है।
उन्होंने बताया कि भारत में औसतन कपास उत्पादन चार सौ पचास किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि ब्राज़ील और ऑस्ट्रेलिया में यह कई गुना अधिक है। अतुल गणात्रा ने सरकार से मांग की कि आगामी बजट में नई बीज तकनीक के विकास के लिए पंद्रह हज़ार करोड़ रुपये का विशेष फंड दिया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी। किसानों को असली लाभ तब मिलेगा, जब उनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ेगी।
अतुल गणात्रा ने यह भी सुझाव दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीद बंद कर “भावांतर योजना” लागू की जाए, ताकि सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में सहायता राशि भेज सके। इससे सभी कपास किसानों को लाभ मिलेगा और कपड़ा उद्योग की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
कपास आयात बढ़ने पर उन्होंने कहा कि शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति और घरेलू कपास की ऊँची कीमतें इसकी प्रमुख वजह हैं। भारतीय कीमतें वैश्विक बाजार से काफी अधिक होने के कारण भारत से कपास निर्यात फिलहाल संभव नहीं है।