युद्ध से बढ़ी कपास की कीमतें 8,500 के पार, लेकिन किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
महाराष्ट्र (सेलू): अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर कपास की मांग में तेजी आई है, जिससे इसके दाम बढ़ गए हैं। एक खांडी (दो गांठ) का भाव बढ़कर 53 हजार से 58 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बुधवार को कृषि उपज मंडी समिति परिसर में निजी व्यापारियों ने कपास के लिए 8,400 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दिया।
हालांकि, इस बढ़ी हुई कीमत का किसानों को खास लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि जिले और तालुका स्तर पर किसानों के पास बेचने के लिए कपास लगभग समाप्त हो चुका है। इस साल खरीफ सीजन में भारी बारिश के कारण उत्पादन कम हुआ और शुरुआती दौर में कम कीमत मिलने से किसानों ने सीमित मात्रा में ही कपास बेचा। पिछले एक महीने से बाजार में कपास की आवक बंद है, जिससे सीजन लगभग खत्म हो चुका है।
पहले निजी व्यापारियों द्वारा कपास का भाव 7,200 रुपये प्रति क्विंटल तक था, वहीं भारतीय कपास निगम (CCI) ने भी अपनी खरीद बंद कर दी थी। बाजार में कपास की कमी के कारण जिनिंग मिलों में पिछले एक महीने से उत्पादन भी ठप पड़ा है।
तिरूपति कॉटन इंडस्ट्रीज एंड ऑयल मिल, वालूर के रितेश तोशनीवाल के अनुसार, “युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतें बढ़ी हैं। इससे सिंथेटिक धागे के विकल्प के रूप में कपास की मांग बढ़ गई है। अब कपास का भाव साढ़े आठ हजार रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन किसानों के पास बेचने के लिए माल नहीं है। जो थोड़ी बहुत आवक है, उसे व्यापारी तुरंत खरीद रहे हैं।”
इस साल केंद्र सरकार की नीति के तहत देश में 40 लाख गांठ कपास का आयात किया गया, जबकि सामान्यतः यह आंकड़ा 10 लाख गांठ होता है। आयात बढ़ने से पहले कपास का भाव 55-56 हजार रुपये प्रति खांडी था, जो घटकर 52-53 हजार रुपये रह गया था। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण मांग में उछाल आया है और कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं।
सीसीआई द्वारा 8,100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीद की गई थी, लेकिन अधिक नमी वाले कपास को कम कीमत पर लिया गया। व्यापारियों ने गुणवत्ता के अनुसार 7,200 से 7,700 रुपये तक के भाव दिए थे। अब बढ़े हुए दाम का लाभ मुख्यतः व्यापारियों को ही मिल रहा है, क्योंकि किसानों के पास स्टॉक नहीं बचा है।