कपास आयात शुल्क पर सरकार का बीच का रास्ता: सीमित अवधि में राहत या शुल्क में कटौती पर विचार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कपास के आयात शुल्क को लेकर उद्योग और कृषि मंत्रालय के बीच चल रहे मतभेदों के बीच एक “बीच का रास्ता” निकालने का संकेत दिया है। कपड़ा उद्योग ने दिसंबर 2026 तक कपास पर शून्य आयात शुल्क (zero duty) की मांग की थी, जबकि कृषि मंत्रालय इसका विरोध कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि इससे किसानों को गलत संदेश जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब कपास की बुवाई शुरू हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित विकल्पों में एक यह है कि सितंबर-अक्टूबर की अवधि में सीमित समय के लिए शून्य शुल्क आयात की अनुमति दी जाए, क्योंकि अगस्त तक घरेलू स्टॉक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। दूसरा विकल्प मौजूदा 11% आयात शुल्क को घटाकर लगभग 6–7% करना है।
एक उच्चस्तरीय बैठक में, जिसमें FIEO और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी शामिल थे, यह बताया गया कि इस समय Cotton Corporation of India के पास लगभग 47 लाख गांठ कपास उपलब्ध है। निजी क्षेत्र के स्टॉक को मिलाकर देश में अगस्त तक घरेलू मांग पूरी होने की स्थिति है।
हालांकि उद्योग का तर्क है कि घरेलू कीमतें ऊंची हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, नई फसल अक्टूबर से आने की उम्मीद है, इसलिए सरकार को अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा।
कपास उत्पादन 2025-26 में घटकर लगभग 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 297.24 लाख गांठ था। खेती का रकबा भी घट रहा है, जिसका कारण कीट संक्रमण, वैकल्पिक फसलों की ओर रुझान और बेहतर रिटर्न की उम्मीद है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, आने वाले सीजन में उत्पादन 324 लाख गांठ, खपत 315 लाख गांठ और आयात 47 लाख गांठ तक पहुंच सकता है। इसी बीच, सरकार का उद्देश्य उद्योग की जरूरतें और किसानों के हित—दोनों के बीच संतुलन बनाना है।