गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग में लागत बढ़ने से कपड़ों के दाम बढ़े
2026-05-04 12:45:11
महंगे सूती धागे और बढ़ते प्रोसेसिंग खर्च से गुजरात में कपड़े महंगे
गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। चीन और बांग्लादेश से सूती धागे की तेज मांग के चलते इसकी कीमतें लगभग चार साल बाद बढ़कर रिकॉर्ड 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। इसका असर पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन पर पड़ा है, जिससे कपड़ों की कीमतों में वृद्धि और बाज़ार में सप्लाई की कमी देखने को मिल रही है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में कपड़ों की कीमतें 10 से 25 रुपये प्रति मीटर तक बढ़ चुकी हैं। इसके पीछे सिर्फ धागे की महंगाई ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग चार्ज में बढ़ोतरी भी बड़ी वजह है। ईंधन और केमिकल्स की कीमतों में उछाल ने टेक्सटाइल प्रोसेसिंग को महंगा बना दिया है, जबकि कई पावरलूम यूनिट्स के बंद होने से उत्पादन पर भी असर पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि अब यह लागत वृद्धि रिटेल स्तर तक पहुंच चुकी है और ग्राहकों को भी महंगे कपड़ों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, मैन्युफैक्चरर्स का मानना है कि घरेलू बाज़ार पर इसका असर सीमित रह सकता है, क्योंकि मौजूदा सीज़न का अधिकांश स्टॉक पहले ही बाजार में पहुंच चुका है। साथ ही, नए सीज़न के लिए कीमतों को पुनः तय करने की गुंजाइश बनी हुई है। अनुमान है कि खुदरा कीमतों में 5% से 8% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
दूसरी ओर, एक्सपोर्ट सेक्टर पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि पहले से तय कॉन्ट्रैक्ट्स के चलते बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालना मुश्किल है। उद्योग ने कपास की ऊंची कीमतों और सीमित उपलब्धता पर भी चिंता जताई है और केंद्र सरकार से 11% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग की है।
लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि, शिपिंग में देरी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यदि हालात नहीं सुधरे, तो उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर व्यापक असर पड़ सकता है।