हनुमानगढ़ में भाखड़ा नहर का पानी शुरू, कपास और खरीफ बुवाई को मिलेगा फायदा
2026-05-22 14:56:07
भाखड़ा नहर प्रणाली से आज से सिंचाई पानी:रोटेशन घोषित, कपास-नरमा की बुवाई के लिए किसानों को मिलेगा पानी
हनुमानगढ़ में भाखड़ा नहर प्रणाली से जुड़े किसानों को आज गुरुवार से सिंचाई का पानी मिलना शुरू हो जाएगा। सिंचाई विभाग ने भाखड़ा प्रणाली का नया रोटेशन जारी किया है। इसके तहत 1200 क्यूसेक क्षमता वाली नहरों में पूरी क्षमता से पानी छोड़ा जाएगा, जबकि छोटी नहरों में उनकी क्षमता के अनुसार पानी उपलब्ध होगा।
जल संसाधन भाखड़ा-सिद्धमुख रेगुलेशन खंड ने भाखड़ा प्रणाली की नहरों का साप्ताहिक वरीयताक्रम भी जारी कर दिया है। यह वरीयताक्रम 21 से 29 मई तक प्रभावी रहेगा।
विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, रतनपुरा (आरटीपी) नहर में 42 क्यूसेक, नाथवाना (एनटीडब्ल्यू) में 73, प्रतापपुरा (पीटीपी) में 248, हरिपुरा (एचआरपी) में 261, दीनगढ़ (डीएनजी) में 274, सूरतपुरा (एसटीपी) में 283, मोडिया (एमओडी) में 508, लोंगवाला (एलजीडब्ल्यू) में 653, पीलीबंगा (पीबीएन) में 868, अमरपुरा (एएमपी) में 963, रोड़ांवाली (आरआरडब्ल्यू) में 976, नवां-सतीपुरा (एनडब्ल्यूएन) में 987, मोरजण्डा (एमजेडी) में 1200, नगराना (एनजीडी) में 1208, लीलांवाली (एलएलडब्ल्यू) में 1448, भाखरांवाली (बीकेडब्ल्यू) में 1453, करनीसिंह (केएसडी) में 1783, मम्मड़खेड़ा (एमएमके) में 1978, जोड़कियां (जेआरके) में 2058, सूरतगढ़ (एसटीजी) में 2178, भगतपुरा (बीजीपी) में 2216 और संगरिया (एसएनजी) नहर में 2222 क्यूसेक पानी प्रवाहित होगा।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक नहर को आठ दिन तक पूरी क्षमता से चलाने के बाद बंद किया जाएगा। नहरों में पानी के उतार-चढ़ाव की स्थिति में यदि किसी नहर के रेगुलेशन में बदलाव की आवश्यकता हुई, तो भाखड़ा सिद्धमुख रेगुलेशन खंड और जल संसाधन खंड प्रथम/द्वितीय के अधिशाषी अभियंता से विचार-विमर्श के बाद व्यवस्था की जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय नरमा और कपास की बुवाई का है। सिंचाई के लिए पानी मिलने से किसानों को बड़ी सहायता मिलेगी।
पिछले दिनों तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण किसानों को खेतों की तैयारी में परेशानी हो रही थी। अब नहरों में पानी आने से बुवाई के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पानी की आपूर्ति नियमित बनी रहती है तो कपास, नरमा और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई बेहतर तरीके से हो सकेगी, जिससे उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इधर, भीषण गर्मी के बीच पानी की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है