CITI, तेलंगाना भारत के हैदराबाद में ATEXCON 2026 की मेज़बानी करेगा
कॉन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI), तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर, 2-3 अप्रैल, 2026 को हैदराबाद में 13वें एशियाई टेक्सटाइल सम्मेलन (ATEXCON) की मेज़बानी करेगा। "वैश्विक वस्त्रों के भविष्य की पुनर्कल्पना" (Reimagining the Future of Global Textiles) की थीम पर आधारित यह कार्यक्रम तेलंगाना टेक्सटाइल डायलॉग के साथ-साथ चलेगा, जिसमें वैश्विक उद्योग जगत के नेता, नीति-निर्माता और हितधारक एक साथ जुटेंगे।
ATEXCON 2026 का उद्देश्य वस्त्र और परिधान उद्योग के अगले दशक को आकार देने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में काम करना है। CITI के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन के अनुसार, यह सम्मेलन केवल चर्चाओं तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता और तेज़ी से हो रहे बदलावों के बीच इस क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए ठोस रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
यह सम्मेलन तीन मुख्य स्तंभों पर केंद्रित होगा: फाइबर और कपड़े, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखलाएं, तथा बाज़ार और व्यापार। चर्चाओं में बायो-फाइबर, मानव-निर्मित फाइबर और पता लगाने की क्षमता (traceability) जैसे बड़े पैमाने पर लागू होने वाले नवाचारों के साथ-साथ AI-संचालित विनिर्माण, स्वचालन और चक्रीयता (circularity) में हुई प्रगति, तथा उभरते उपभोक्ता बाज़ारों तक पहुँचने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
मुख्य आकर्षणों में नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए एक मंत्री स्तरीय रात्रिभोज, वस्त्र क्षेत्र में दिए गए योगदान को सम्मानित करने के लिए 'लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड्स', और एक 'स्टार्टअप पिच और नेटवर्किंग गाला' शामिल हैं। यह स्टार्टअप मंच सामग्री, रीसाइक्लिंग, AI, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में हुए नवाचारों को विशेष रूप से प्रदर्शित करेगा।
प्रतिनिधियों को वारंगल में स्थित 'PM MITRA पार्क' का दौरा करने का अवसर भी मिलेगा, जिससे उन्हें भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे वस्त्र विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में गहन जानकारी प्राप्त होगी। यह पहल एकीकृत और बड़े पैमाने पर वस्त्र अवसंरचना (infrastructure) के निर्माण की दिशा में देश के प्रयासों को दर्शाती है।
इसके समानांतर आयोजित होने वाला 'तेलंगाना टेक्सटाइल डायलॉग' एक ऐसे भविष्य-उन्मुख वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर केंद्रित होगा, जो स्थिरता, प्रौद्योगिकी और वैश्विक सहयोग पर आधारित हो। नीति, निवेश, नवाचार और कौशल विकास जैसे विविध विषयों पर होने वाली चर्चाओं के साथ, यह कार्यक्रम भारत की उस व्यापक महत्वाकांक्षा के अनुरूप है, जिसके तहत भारत वर्ष 2030 तक अपने वस्त्र और परिधान उद्योग को 350 अरब डॉलर तक पहुँचाना चाहता है, और साथ ही इसे एक प्रमुख आर्थिक और रोज़गार-सृजक क्षेत्र के रूप में और अधिक मज़बूत बनाना चाहता है।