पाकिस्तान के टेक्सटाइल उद्योग की मांग: जीरो-रेटेड ऊर्जा बहाल हो, लंबित रिफंड तुरंत जारी किए जाएं
इस्लामाबाद: पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग गहरे संकट का सामना कर रहा है और उसने सरकार से जीरो-रेटेड ऊर्जा सुविधा बहाल करने तथा लंबित रिफंड तुरंत जारी करने की मांग की है। इस संबंध में ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, यदि कपास (फूटी) की कीमत इंटरवेंशन प्राइस से नीचे बनी रहती है, तो ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान (TCP) को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। वहीं, रेडीमेड गारमेंट्स निर्माताओं और निर्यातकों का कहना है कि ऑडिट नोटिस भेजने के बजाय सरकार को लंबित रिफंड का भुगतान प्राथमिकता से करना चाहिए।
दूसरी ओर, पाकिस्तान किसान इत्तेहाद ने देश में कृषि आपातकाल लागू करने की मांग की है। यार्न व्यापारियों ने बिजली और गैस की दरों में भारी वृद्धि का विरोध करते हुए इसे उद्योग के लिए असहनीय बताया है।
उद्योग पर गहराता संकट
टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी उदासीनता के कारण देश का सबसे बड़ा निर्यातक और रोजगार देने वाला उद्योग पतन के कगार पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 50% से अधिक मिलें और संबंधित इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य आंशिक क्षमता पर चल रही हैं।
वैल्यू-एडेड और होजरी सेक्टर के नेताओं ने सरकार पर संवाद से बचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार बैठक के प्रयासों के बावजूद प्रधानमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी। उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो निवेशक अपने कारोबार को अन्य देशों में स्थानांतरित कर सकते हैं।
लागत में वृद्धि, निर्यात पर असर
APTMA के अध्यक्ष आसिफ इनाम के अनुसार, उच्च ब्याज दर, गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी (₹45 प्रति यूनिट तक) और कपास आयात में कठिनाइयों के कारण उद्योग संचालन मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में किसी भी उद्योग को चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
इस वर्ष कपड़ा निर्यात का लक्ष्य लगभग 26 अरब डॉलर रखा गया था, लेकिन मौजूदा हालात में यह घटकर 19 अरब डॉलर से भी कम रहने की आशंका है। अनुमान है कि कुल निर्यात में करीब 10 अरब डॉलर की कमी आ सकती है।
सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग
उद्योग जगत ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर ऊर्जा लागत कम करने, रिफंड जारी करने और उद्योग तथा कृषि क्षेत्र को राहत देने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बेरोजगारी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
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