बढ़ते आयात से 2026-27 में भारत का कॉटन कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक 85 लाख गांठ से अधिक रहने का अनुमान
टेक्सटाइल उद्योग को बेहतर गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा हाल ही में आयात शुल्क में दी गई छूट का असर कपास बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025-26 सीज़न में भारत का कुल कपास आयात 60-65 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) तक पहुंच सकता है। इसके परिणामस्वरूप अक्टूबर 2026 में शुरू होने वाले 2026-27 सीज़न के लिए देश का कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक लगभग 42 प्रतिशत बढ़कर 85 लाख गांठ से अधिक रहने की संभावना है।
Cotton Association of India (CAI) के अनुसार, मई 2026 के अंत तक देश में 43.5 लाख गांठ कपास का आयात हो चुका था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 33 लाख गांठ की तुलना में करीब 32 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले CAI ने पूरे सीज़न के लिए 47 लाख गांठ आयात का अनुमान लगाया था, लेकिन शुल्क छूट के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बन गई है।
CAI की क्रॉप कमेटी के चेयरमैन Atul S. Ganatra के अनुसार, मई के अंत तक 43.5 लाख गांठ कपास भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुका था। उनका मानना है कि हालिया नीति बदलाव के बाद लगभग 15 लाख गांठ अतिरिक्त आयात हो सकता है, जिससे कुल आयात 60-65 लाख गांठ तक पहुंच जाएगा।
CAI ने 2025-26 के लिए कपास उत्पादन का अनुमान 334 लाख गांठ पर बरकरार रखा है। वहीं, सीज़न के अंत में क्लोजिंग स्टॉक 85.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 60 लाख गांठ के मुकाबले लगभग 25 लाख गांठ अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू और आयातित कपास की कीमतें लगभग समान होने के बावजूद टेक्सटाइल मिलें आयातित कपास को प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि इससे लगभग 4 प्रतिशत अधिक धागा प्राप्त होता है और तैयार धागे को बाजार में करीब ₹7 प्रति किलोग्राम अधिक कीमत मिलती है। यही कारण है कि आयातित कपास की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
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