कमजोर मानसून से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के किसानों पर संकट, फसल नुकसान से पलायन बढ़ा
2026-07-28 12:43:39
कमजोर मॉनसून से कर्नाटक-आंध्र प्रदेश में किसान संकट
कलबुर्गी/जोगुलम्बा गडवाल: कमजोर मॉनसून और बारिश की कमी ने कर्नाटक के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र तथा आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश नहीं होने से सोयाबीन, दालें, कपास और अन्य वर्षा आधारित फसलें सूख रही हैं। खेती से रोजगार के अवसर घटने के कारण किसान और खेतिहर मजदूर बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
कल्याण कर्नाटक के कलबुर्गी, बल्लारी, यादगीर और रायचूर जिलों में किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कई इलाकों में खेतों की मिट्टी सूख चुकी है और फसलें खराब हो रही हैं। कई जगह बीज अंकुरित नहीं हुए, जबकि जहां पौधे उगे भी, वे मिट्टी में नमी की कमी के कारण कमजोर होकर सूखने लगे हैं।
तालाबों और जलाशयों में पानी की कमी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से कई किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है।
किसान संगठनों के अनुसार, इस बार पलायन केवल खेतिहर मजदूरों तक सीमित नहीं है। छोटे और मध्यम किसान भी खेती में हो रहे नुकसान के कारण गांव छोड़कर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जा रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कर दूसरे शहरों में बसने लगे हैं।
कर्नाटक राज्य रैथा संघ–हसिरू सेना के अध्यक्ष माधव रेड्डी ने कहा कि बारिश की कमी से किसान और खेतिहर मजदूर दोनों प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत देने की मांग की।
कर्नाटक प्रांत रैथा संघ के कलबुर्गी जिला अध्यक्ष शरणबसप्पा मामाशेट्टी ने कहा कि कई इलाकों में किसानों की फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। उन्होंने सरकार से किसानों को मुफ्त बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की, क्योंकि भारी नुकसान के बाद कई किसान दोबारा बुवाई करने की स्थिति में नहीं हैं।
वहीं, आंध्र प्रदेश के जोगुलम्बा गडवाल जिले के उंडावल्ली गांव में किसान रजाक ने बारिश की कमी से खराब हुई 10 एकड़ कपास की फसल को ट्रैक्टर चलाकर हटा दिया। उन्होंने एक महीने पहले पट्टे पर जमीन लेकर कपास की बुवाई की थी, लेकिन बारिश नहीं होने से पौधों का विकास रुक गया। किसान के अनुसार, उन्हें लगभग 1.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
कमजोर मॉनसून ने दोनों राज्यों में किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। किसान संगठन सरकार से सूखा राहत, बीज-उर्वरक सहायता और प्रभावित किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।