कमज़ोर मॉनसून से खरीफ फसलों पर संकट, 315 जिलों के लिए केंद्र ने बनाई आपात योजना
इस साल कमजोर मॉनसून की आशंका ने खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को बताया कि कम बारिश से प्रभावित होने वाले जिलों के लिए कृषि मंत्रालय ने आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली हैं। सरकार ने ऐसे करीब 315 जिलों की पहचान की है, जहां सामान्य से कम बारिश होने पर खेती पर असर पड़ सकता है।
राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में चौहान ने कहा कि इन जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनमें से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि यहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत या उससे कम है। इन क्षेत्रों में कम बारिश का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ने की संभावना है।
इसके अलावा 76 जिलों को मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां 25 से 50 प्रतिशत तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। वहीं 128 जिले कम प्राथमिकता वाले हैं, जहां बांधों और अन्य जल स्रोतों के कारण सिंचाई की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। प्रभावित जिलों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों के कई क्षेत्र शामिल हैं।
कृषि मंत्री ने बताया कि कमजोर मॉनसून की स्थिति के पीछे अल नीनो प्रभाव को एक कारण माना जा रहा है। देश में अब तक सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस मॉनसून सीजन में दीर्घकालिक औसत बारिश का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह लंबे समय में कमजोर मॉनसून वर्षों में शामिल हो सकता है।
मॉनसून की धीमी रफ्तार का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ सकता है। इसे देखते हुए दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप” बनाया गया है, जो बारिश, बुआई, फसल की स्थिति, बाजार संकेतों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता की समीक्षा करेगा।
सरकार ने राज्यों को कंट्रोल रूम स्थापित करने और केंद्र के साथ बेहतर तालमेल के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। वहीं ICAR और ICAR-CRIDA ने जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें वैकल्पिक फसलें, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों के जोखिम को कम करने जैसे उपाय शामिल हैं।