विश्व कपास दिवस: कपास या सोयाबीन? बढ़ती लागत और सूखे ने किसानों की बढ़ाई चिंता
वाशिम: महाराष्ट्र का वाशिम जिला कभी कपास उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल था। खासकर करंजा और मनोरा तालुका कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। हालांकि, बढ़ती उत्पादन लागत, मजदूरों की कमी, कपास चुनाई की बढ़ती मजदूरी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव के कारण किसान धीरे-धीरे अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
इस साल वाशिम जिले में 37,756 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है। लेकिन लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसल की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मिट्टी में नमी कम होने से कपास के पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है और किसानों के सामने खड़ी फसल को बचाने की चुनौती है।
15 साल में कपास का रकबा घटा
करीब 15 साल पहले वाशिम जिले में कपास की खेती 50,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती थी। अब कपास का रकबा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। इस साल जिले में कपास की बुवाई 37,756 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है।
कपास की खेती में अधिक लागत आती है और फसल लंबे समय तक खेत में रहती है। समय पर मजदूर नहीं मिलने और बढ़ती मजदूरी के कारण किसानों की परेशानी बढ़ रही है। बाजार भाव में अनिश्चितता के बीच कई किसान सोयाबीन, हल्दी और अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
बारिश की कमी से उत्पादन पर खतरा
करंजा और मनोरा के कपास उत्पादक क्षेत्रों में करीब दो महीने तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से मिट्टी की नमी कम हुई है। इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो कपास में डोडे बनने और कुल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
किसानों ने फसल नुकसान के लिए सरकार से ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की है।
MSP पर बिक्री के लिए पंजीकरण जरूरी
2026-27 सीजन में CCI को MSP पर कपास बेचने के इच्छुक किसानों के लिए ‘कपास किसान’ मोबाइल ऐप पर स्व-पंजीकरण करना जरूरी है। किसान 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं।
2026-27 के लिए कपास का MSP मीडियम स्टेपल के लिए ₹8,267 प्रति क्विंटल और लॉन्ग स्टेपल के लिए ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों को उम्मीद है कि बाजार भाव MSP से नीचे जाने पर CCI की खरीद से उन्हें राहत मिलेगी।
विश्व कपास दिवस पर किसानों की चुनौती
7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस मनाया जाता है। वाशिम के किसानों के लिए बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी, पानी की समस्या, मौसम की अनिश्चितता और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में इस सीजन किसानों की प्राथमिकता खड़ी फसल बचाना, फसल नुकसान पर राहत पाना और MSP के जरिए बाजार समर्थन प्राप्त करना है।
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