टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार की बड़ी तैयारी, 25,000 करोड़ रुपये की कौशल विकास पहल का प्रस्ताव
नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को मजबूत बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में 25,000 करोड़ रुपये की कौशल विकास पहल शुरू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित योजना का उद्देश्य श्रमिकों को आधुनिक तकनीक और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना है, ताकि भारतीय कपड़ा उद्योग की उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस पहल के माध्यम से बड़ी संख्या में कुशल श्रमिक तैयार करना चाहती है। वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की विनिर्माण क्षमता और निर्यात को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
समर्थ 2.0 के तहत कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा
वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित 'समर्थ 2.0' का उद्देश्य मौजूदा कौशल विकास व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। इसके तहत उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की योजना है। साथ ही, श्रमिकों को आधुनिक मशीनों और नई उत्पादन तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा।
पिछली योजना के मुकाबले प्रस्तावित राशि में बड़ी बढ़ोतरी
समर्थ 2.0 के लिए प्रस्तावित 25,000 करोड़ रुपये की राशि पिछली योजना के मुकाबले काफी अधिक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समर्थ 1.0 के तहत मार्च 2026 तक के पांच वर्षों में टेक्सटाइल श्रमिकों के कौशल विकास पर लगभग 740 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के प्रस्ताव की व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) समीक्षा कर चुकी है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जा सकता है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इससे टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता, रोजगार के अवसरों और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होने की उम्मीद है।
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