महाराष्ट्र: राजुरा में बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित, किसानों पर दोबारा बुवाई का संकट
2026-07-07 13:41:27
महाराष्ट्र: राजुरा में बारिश की कमी से कपास की फसल पर संकट, किसानों के सामने दोबारा बुवाई की चुनौती
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के राजुरा तालुका में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से कपास की फसल प्रभावित हुई है। मृग नक्षत्र की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर कपास की बुवाई की थी, लेकिन इसके बाद बारिश थम जाने से कई क्षेत्रों में बीज मिट्टी के भीतर ही सूख गए। अब किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है, जिससे खरीफ सीज़न की शुरुआत में ही चिंता बढ़ गई है।
शुरुआती दो-तीन दिनों की छिटपुट बारिश से उत्साहित किसानों को उम्मीद थी कि मानसून जल्द सक्रिय होगा। इसी भरोसे पर उन्होंने सूखी ज़मीन में कपास के बीज बो दिए। हालांकि, पिछले चार-पांच दिनों से बारिश नहीं होने के कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन सकी और कई स्थानों पर अंकुर मिट्टी से बाहर निकलने से पहले ही नष्ट हो गए।
राजुरा तालुका के गोवारी, सस्ती, पोवनी, साखरी, चिंचोली, कढोली, मनौली, बाबापुर, चार्ली, निर्ली, घिडशी, मथरा, गोयेगांव और अंतरगांव सहित कई गांवों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। किसानों का कहना है कि महंगे बीज, खाद और खेत तैयार करने पर खर्च के बावजूद बारिश की कमी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
मौसम के अनिश्चित रुख ने खेती की योजना को और कठिन बना दिया है। जिन किसानों ने कर्ज या उधार लेकर खेती की थी, उन्हें अब दोबारा बुवाई के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
तालुका कृषि अधिकारी विनायक पायघन ने किसानों को सलाह दी है कि केवल छिटपुट बारिश के आधार पर बुवाई का जोखिम न उठाएं। उनके अनुसार, बुवाई तभी करनी चाहिए जब कम से कम 100 मिमी बारिश हो चुकी हो और खेत में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो।
किसानों का कहना है कि उन्होंने मृग नक्षत्र के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद में कपास की बुवाई की थी, लेकिन महत्वपूर्ण समय पर वर्षा नहीं होने से अंकुर मिट्टी के भीतर ही मुरझा गए। इससे फसल को भारी नुकसान पहुंचा है और कई किसानों के लिए दोबारा बुवाई करना अब मजबूरी बन गया है।