2026 में अमेरिका से कपास का बड़ा खरीदार बन सकता है भारत, USDA का अनुमान
2026-07-17 12:43:59
इस साल भारत, अमेरिकी कपास का अहम खरीदार बन सकता है
अमेरिका को उम्मीद है कि 2026 में भारत उसकी कपास का एक प्रमुख आयातक बनकर उभरेगा। नेशनल कॉटन काउंसिल ऑफ अमेरिका के प्रेसिडेंट और CEO गैरी एडम्स ने कहा कि भारत इस समय अमेरिकी कपास के लिए चौथे सबसे बड़े बाज़ार की दौड़ में है। उनका मानना है कि भारत में कपास की खेती का रकबा घटने और मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आयात की मांग और बढ़ सकती है।
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट Cotton: World Markets and Trade में भारत के 2025-26 सीज़न के कपास आयात का अनुमान बढ़ाकर 56.9 लाख गांठ कर दिया है, जो पहले 53.18 लाख गांठ था। वहीं, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 60–65 लाख गांठ आयात का अनुमान जताया है। सरकार द्वारा लॉन्ग स्टेपल कॉटन पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क अस्थायी रूप से हटाने से भी आयात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एडम्स ने बताया कि पिछले वर्ष अमेरिकी कपास का सबसे बड़ा खरीदार वियतनाम रहा, जबकि बांग्लादेश का टेक्सटाइल उद्योग भी मजबूत मांग बनाए हुए है। इसके विपरीत, अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव के कारण चीन में अमेरिकी कपास की मांग कमजोर रही है।
USDA का अनुमान है कि 2026-27 सीज़न में वैश्विक कपास की खपत 1.5 से 2 प्रतिशत बढ़ सकती है। हालांकि, ऊर्जा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें उद्योग के लिए चिंता का विषय हैं। ऊंचे तेल दामों से सिंथेटिक फाइबर महंगे हुए हैं, जिससे प्राकृतिक रेशों, विशेषकर कपास, की मांग को समर्थन मिला है।
एडम्स ने कहा कि अमेरिका में पिछले दो से तीन वर्षों में उर्वरक, ईंधन, रसायन और श्रम की बढ़ती लागत के कारण कपास उत्पादन की लागत करीब 20 प्रतिशत बढ़ गई है। साथ ही, अमेरिकी कॉटन बेल्ट में सूखे की स्थिति भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण उपभोक्ता प्राकृतिक रेशों की ओर लौट रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच कपास एवं टेक्सटाइल क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है।