भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में रिकवरी मजबूत, कॉटन कीमतें बनीं चुनौती
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर मजबूत रिकवरी की ओर बढ़ रहा है। 360 ONE Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू स्तर पर कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता और सोर्सिंग में बढ़े लचीलेपन से उद्योग के मार्जिन और स्प्रेड को सहारा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, रिकवरी की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कॉटन की बढ़ी हुई लागत को यार्न की कीमतों में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो से ढाई वर्षों में कॉटन स्पिनिंग के लिए यह एक बेहतर तिमाही रही है। मजबूत मांग, क्षमता के बेहतर इस्तेमाल और यार्न स्प्रेड में सुधार ने उद्योग को फायदा पहुंचाया है। क्षमता बंद होने और नई क्षमता में सीमित बढ़ोतरी से मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बेहतर हुआ है।
चीन से बढ़ी मांग भारतीय यार्न उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक रही है। चीन में कॉटन की अपेक्षाकृत ऊंची कीमतों के कारण भारतीय यार्न का आयात आर्थिक रूप से आकर्षक हुआ है। इससे भारतीय यार्न का मासिक निर्यात करीब 95-97 मिलियन किलोग्राम से बढ़कर लगभग 110 मिलियन किलोग्राम हो गया है।
हालांकि, दूसरी तिमाही में कॉटन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने स्पिनिंग मार्जिन के लिए जोखिम बढ़ाया है। यदि यार्न की कीमतें बढ़ी हुई कच्चे माल की लागत के अनुरूप नहीं बढ़तीं, तो हालिया स्प्रेड सुधार पर दबाव पड़ सकता है।
डाउनस्ट्रीम सेगमेंट में भी सुधार के संकेत हैं। गारमेंट कंपनियों को बेहतर ऑर्डर और होम टेक्सटाइल उद्योग को अमेरिका से मजबूत मांग का लाभ मिल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत का टेक्सटाइल और परिधान निर्यात 3,25,339 करोड़ रुपये रहा, जो 2024-25 के 3,19,573.2 करोड़ रुपये से 1.8 प्रतिशत अधिक है।
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