2030 तक ₹350 अरब नहीं, $350 अरब का टेक्सटाइल उद्योग लक्ष्य

2026-10-27 13:17:03
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भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का 2030 तक 350 अरब डॉलर का लक्ष्य, बढ़ती लागत बनी चुनौती

 भारत का टेक्सटाइल उद्योग वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 190 अरब डॉलर का हो गया। Rubix Data Sciences की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग का लक्ष्य 2030 तक 350 अरब डॉलर तक पहुँचना है। यह लक्ष्य उद्योग के कुल आकार का है, निर्यात का नहीं।

निर्यात में सुधार

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का टेक्सटाइल और परिधान निर्यात 2.7% घटकर 35.8 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात 17.1% बढ़कर 9.6 अरब डॉलर हो गया। इसके बाद अप्रैल–अगस्त 2026 के दौरान टेक्सटाइल निर्यात, हस्तशिल्प सहित, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.3% बढ़ा। यह वृद्धि रुपये के मूल्य में दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2025-26 में रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी टेक्सटाइल निर्यात में 44% रही, जबकि मैन-मेड फाइबर (MMF) टेक्सटाइल की हिस्सेदारी 15% तक पहुँची। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा, जिसकी हिस्सेदारी 31% थी। यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी लगभग 16% रही।

कपास धागे की कीमतों से दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, कपास धागे की कीमत सितंबर 2026 में लगभग ₹400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई, जबकि वर्ष की शुरुआत में यह करीब ₹250 प्रति किलोग्राम थी। यानी कीमत में लगभग 60% वृद्धि हुई, जिससे कपड़ा निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ी।

भारत का कपास उत्पादन 2020-21 के 352.48 लाख गांठ से घटकर 2025-26 में 290.91 लाख गांठ रह गया। 2025-26 का आँकड़ा अनंतिम है। प्रत्येक गांठ का मानक वजन 170 किलोग्राम है।

केंद्र सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर 11% सीमा शुल्क से 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक छूट दी थी। इस छूट को दिसंबर तक बढ़ाने पर विचार किए जाने की खबर आई थी, लेकिन आधिकारिक आदेश के बिना इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

निवेश और आधुनिकीकरण

सरकार ₹40,000 करोड़ की पाँच वर्षीय टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट (TEEM) योजना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य मशीनरी का आधुनिकीकरण और पारंपरिक टेक्सटाइल क्लस्टरों में तकनीक तथा उत्पादकता को बेहतर बनाना है।

PM MITRA पार्कों के लिए निवेश प्रस्ताव अगस्त 2026 तक ₹68,590 करोड़ तक पहुँच गए थे।

निष्कर्ष: भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के सामने विकास की संभावनाएँ हैं, लेकिन महँगा कच्चा माल, वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता और लागत प्रतिस्पर्धा प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। निर्यात बाजारों में विविधता और तकनीकी आधुनिकीकरण भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होंगे।


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