गुजरात और महाराष्ट्र में धीमी बुआई से भारत में कपास का रकबा लगभग 15% घटा
2026-07-18 12:59:23
गुजरात और महाराष्ट्र में धीमी बुआई से भारत में कपास का रकबा करीब 15% घटा
भारत में 2026 खरीफ सीजन के शुरुआती चरण में कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में काफी पीछे चल रही है। मॉनसून में देरी और क्षेत्रीय मौसम परिस्थितियों के कारण प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई की गति प्रभावित हुई है। 10 जुलाई 2026 तक देश में 79.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93.95 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कपास का रकबा 14.41 लाख हेक्टेयर या करीब 15.3% कम रहा है।
बुआई में सबसे बड़ी गिरावट गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में देखी गई है। महाराष्ट्र में इस सीजन अब तक 30.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हुई है, जो पिछले वर्ष के 35.46 लाख हेक्टेयर से 5.39 लाख हेक्टेयर कम है। विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे प्रमुख कपास क्षेत्रों में देर से हुई बारिश के कारण किसानों की बुआई गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
गुजरात में गिरावट और अधिक रही। राज्य में कपास का रकबा पिछले साल के 17.11 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.32 लाख हेक्टेयर रह गया, यानी 7.79 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई। गुजरात और महाराष्ट्र मिलकर देश में कपास के कुल रकबे में आई लगभग 13.2 लाख हेक्टेयर की कमी के लिए जिम्मेदार हैं।
इसके विपरीत, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कपास की बुआई में सुधार देखने को मिला है। तेलंगाना में कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में 1.96 लाख हेक्टेयर बढ़कर 15.96 लाख हेक्टेयर हो गया है। अच्छी बारिश और समय पर कृषि कार्य शुरू होने से राज्य में बुआई को गति मिली है। आंध्र प्रदेश में भी कपास का रकबा 0.78 लाख हेक्टेयर बढ़कर 2.40 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
अन्य प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई पिछले साल के स्तर से नीचे बनी हुई है। राजस्थान में 1.28 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 0.66 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 0.59 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में कपास का रकबा लगभग स्थिर रहा, जबकि तमिलनाडु में भी पिछले वर्ष के मुकाबले कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
2026 खरीफ सीजन के लिए कपास का राष्ट्रीय लक्ष्य 116.12 लाख हेक्टेयर रखा गया है, लेकिन 10 जुलाई तक केवल 79.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो पाई है। हालांकि कपास की बुआई जुलाई और अगस्त की शुरुआत तक जारी रहती है, इसलिए आने वाले हफ्तों में बेहतर मॉनसून से रकबे में सुधार की संभावना बनी हुई है।
यदि बुआई में कमी बनी रहती है, तो आगामी विपणन सीजन में कच्चे कपास की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका असर घरेलू टेक्सटाइल उद्योग, कपास निर्यात और फाइबर कीमतों पर पड़ सकता है। वैश्विक कपास बाजार भी मौसम संबंधी आपूर्ति जोखिमों को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं, ऐसे में भारत की उत्पादन स्थिति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।