आयातित कपास में लागत लाभ नहीं

2026-07-01 13:44:22
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ड्यूटी हटने के बाद भी आयातित कपास पर नहीं मिला खास लागत लाभ: CAI


नई दिल्ली। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार, भारत में कपास के आयात पर लगने वाली 11 प्रतिशत सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को अस्थायी रूप से हटाने के बावजूद आयातित कपास, घरेलू कपास की तुलना में उल्लेखनीय रूप से सस्ती नहीं हुई है।


CAI के मुताबिक, भारतीय और वैश्विक बाजार में कपास की कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में टेक्सटाइल मिलों के लिए आयात का फैसला केवल कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि फाइबर की गुणवत्ता, उपलब्धता और समय पर आपूर्ति जैसे कारकों पर निर्भर रहेगा।


26 जून को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कपास की औसत कीमत C&F फ़ार ईस्ट आधार पर 79.50 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड रही, जिसमें 6.00 सेंट प्रति पाउंड का फ्रेट शामिल है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Cotlook A Index की औसत कीमत 80.00 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड दर्ज की गई।


इस प्रकार भारतीय कपास की कीमत केवल 0.50 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड या करीब 400 रुपये प्रति कैंडी (लगभग 0.63 प्रतिशत) कम रही। CAI का कहना है कि यह मामूली अंतर इंश्योरेंस, पोर्ट हैंडलिंग, इनलैंड लॉजिस्टिक्स और अन्य अतिरिक्त खर्चों के कारण आसानी से समाप्त हो जाता है। इसलिए विदेशी कपास के आयात से टेक्सटाइल मिलों को कोई खास लागत लाभ मिलने की संभावना नहीं है।


गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर लगने वाली 11 प्रतिशत ड्यूटी को निलंबित किया है। हालांकि, ताजा बाजार विश्लेषण से संकेत मिलता है कि इस नीति का आयातित कपास की वास्तविक लागत पर सीमित प्रभाव पड़ा है।


CAI ने स्पष्ट किया कि ड्यूटी हटने के बावजूद आयातकों को फ्रेट, इंश्योरेंस, पोर्ट हैंडलिंग, देश के भीतर परिवहन, वित्तपोषण और विनिमय दर से जुड़े खर्च वहन करने पड़ते हैं। ये अतिरिक्त लागतें घरेलू और आयातित कपास के बीच मौजूद मामूली मूल्य अंतर को पूरी तरह समाप्त कर देती हैं।


एसोसिएशन ने यह भी बताया कि इसी सप्ताह भारतीय कपास का कारोबार ICE दिसंबर 2026 कॉटन फ्यूचर्स के मुकाबले 8.20 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड के प्रीमियम पर हुआ। हालांकि, यह अंतर भारत के स्पॉट बाजार और फॉरवर्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के बीच का है और इसका आयातित कपास की प्रतिस्पर्धात्मकता से सीधा संबंध नहीं है।


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