CCI के 56वें स्थापना दिवस पर गिरिराज सिंह ने दोहराई 'कपास क्रांति' की प्रतिबद्धता, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र): केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के 56वें स्थापना दिवस समारोह में भारत के कपास क्षेत्र को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कपास की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादकता में वृद्धि करने और आधुनिक तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट, संजय सावकारे और अतुल सावे, कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO) तथा बड़ी संख्या में कपास किसानों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में गिरिराज सिंह ने कहा कि कपास भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने बताया कि 2025-26 कपास सीजन के दौरान CCI ने अपने इतिहास के सबसे बड़े न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अवधि में लगभग 24 लाख किसान लेन-देन के माध्यम से 522 लाख क्विंटल से अधिक सीड कॉटन (कपास) की खरीद की गई तथा ₹41,530 करोड़ की राशि सीधे किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। उन्होंने बताया कि 2026-27 कपास सीजन के लिए सीड कॉटन के MSP में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने हाल ही में स्वीकृत 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन – कपास क्रांति' का उल्लेख करते हुए कहा कि ₹5,659 करोड़ के बजट वाला यह पांच वर्षीय मिशन कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने, जिनिंग एवं प्रसंस्करण अवसंरचना के आधुनिकीकरण, 'कस्तूरी कॉटन भारत' के माध्यम से ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप "फार्म टू फैशन" पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर मंत्री ने 'कपास दर्शन' बुलेटिन का शुभारंभ किया, जो किसानों को मौसम, बाजार के रुझान, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की नियमित जानकारी उपलब्ध कराएगा। किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को कॉटन प्लकर मशीन, कॉटन स्टॉक श्रेडर मशीन तथा कंटैमिनेशन कंट्रोल किट भी वितरित की गईं। कार्यक्रम के दौरान भारत के कपास इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें CCI, ICAR-CIRCOT, GIZ, CITI, ICAC, MERAGO/GEOCLARA, TEXPROCIL और मंजीत कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के बीच गुणवत्ता सुधार, ट्रेसबिलिटी, सस्टेनेबल खेती और प्रीमियम भारतीय कपास को बढ़ावा देने संबंधी साझेदारियां शामिल हैं।
CCI के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि कॉर्पोरेशन पिछले 56 वर्षों से पारदर्शी, तकनीक-आधारित और किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से किसानों के हितों की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि CCI किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने, उच्च गुणवत्ता वाले कपास उत्पादन को बढ़ावा देने और 'विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
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