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खानदेश में कपास का रकबा 8 लाख हेक्टेयर से नीचे जाने की आशंका

2026-05-08 16:00:18
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खानदेश में घटेगी कपास की बुवाई, रकबा 8 लाख हेक्टेयर से नीचे जाने की आशंका


खानदेश क्षेत्र में लगातार दूसरे वर्ष कपास की खेती के रकबे में गिरावट आने की संभावना है। अनुमान है कि इस साल क्षेत्र में कुल कपास बुवाई 8 लाख हेक्टेयर से कम रह सकती है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा जलगांव जिले का होगा, जहाँ लगभग 4.75 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती होने का अनुमान है। राज्य में सर्वाधिक कपास क्षेत्र वाला जिला होने के कारण जलगांव इस वर्ष भी अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखेगा।


हालांकि, जलगांव के साथ-साथ धुले और नंदुरबार जिलों में भी कपास के रकबे में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

जलगांव जिले में कपास का क्षेत्रफल वर्ष 2022 में 5.67 लाख हेक्टेयर था, जो 2023 में घटकर 5.54 लाख हेक्टेयर और 2024 में 5.11 लाख हेक्टेयर रह गया। पिछले सीजन (2023-24) में यह आंकड़ा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर तक सीमित रहा।


पूरे खानदेश क्षेत्र में कपास की खेती 2022 में 8.70 लाख हेक्टेयर थी। यह 2023 में घटकर 8.50 लाख हेक्टेयर और 2024 में 8.30 लाख हेक्टेयर रह गई। इस वर्ष धुले जिले में लगभग 1.60 लाख हेक्टेयर तथा नंदुरबार में करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बुवाई होने का अनुमान है। सबसे अधिक गिरावट धुले जिले में दर्ज की जा रही है।

 घाटे का सौदा बनती कपास खेती

कपास की खेती किसानों के लिए लगातार अलाभकारी साबित हो रही है। गुलाबी इल्ली (पिंक बॉलवर्म) का बढ़ता प्रकोप, मजदूरों की कमी और बाजार में कपास को कम दाम मिलने जैसी समस्याओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि सूखा प्रभावित इलाकों के कई किसान अब कपास छोड़कर सोयाबीन की ओर रुख कर रहे हैं।

वहीं, जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है, वे पपीता और केला जैसी नकदी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ किसानों ने इस वर्ष कपास के लिए निर्धारित रकबा भी कम करने का निर्णय लिया है।


जलगांव अब भी राज्य में नंबर वन


पिछले कई वर्षों से जलगांव जिला महाराष्ट्र में कपास की खेती के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। इस वर्ष भले ही जिले में कपास का क्षेत्रफल घटने की संभावना हो, लेकिन राज्य में सर्वाधिक कपास बुवाई वाला जिला जलगांव ही रहेगा।


जलगांव के बाद यवतमाल जिले का स्थान आता है, जहाँ हर वर्ष लगभग 4.5 लाख हेक्टेयर या उससे कुछ कम क्षेत्र में कपास की बुवाई की जाती है।


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