बड़वानी के कपास को मिलेगी गुणवत्ता की पहचान, हर बेल पर ₹500 तक इंसेंटिव
खेत से जिनिंग तक गुणवत्ता मानकों से जोड़ी जाएगी पूरी प्रक्रिया, जिले में कॉटन टेस्टिंग लैब स्थापित करने की तैयारी
बड़वानी जिले के कपास को देश-विदेश के बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए अब खेत से लेकर जिनिंग तक पूरी प्रक्रिया को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। कस्तूरी कॉटन भारत मिशन के तहत जिले में कॉटन टेस्टिंग लैब स्थापित करने की पहल की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर ही कपास की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण संभव हो सकेगा।
कपास की गुणवत्ता में सुधार के लिए जिनिंग इकाइयों में पोस्ट-क्लीनिंग मशीन लगाने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं, गुणवत्तायुक्त कपास को कस्तूरी कॉटन के रूप में बढ़ावा देने पर प्रत्येक बेल पर ₹500 तक का इंसेंटिव दिए जाने की जानकारी दी गई है। इससे गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों और जिनिंग इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस संबंध में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के सीएमडी ललित कुमार गुप्ता ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर एवं जिले के अधिकारियों के साथ जिनिंग और स्पिनिंग उद्योग से जुड़े व्यापारियों से चर्चा की। बैठक में बड़वानी के कपास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता, स्वच्छता और ट्रेसबिलिटी पर चर्चा हुई।
मिशन के तहत किसानों को कपास की पिकिंग के समय से ही साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। कपास में मिट्टी, पत्तियां, कचरा अथवा अन्य बाहरी सामग्री की मिलावट रोकने पर विशेष जोर रहेगा। इसके बाद भंडारण, परिवहन और जिनिंग के दौरान भी गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि इस दिशा में जिले में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। जल्द ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कपास की गुणवत्ता सुधारने और बड़वानी के कपास को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।