बांग्लादेश में अशांति का असर धागे और कपड़े के निर्यात पर पड़ने की संभावना है
वेतन विरोध से अल्पकालिक व्यवधान संभव; लंबे समय में भारतीय परिधान निर्यातकों को अतिरिक्त ऑर्डर मिल सकते हैं
बांग्लादेश की गारमेंट फैक्ट्रियों में वेतन को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों से वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला और भारत के धागे एवं कपड़ा निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। भारतीय उद्योग अधिकारियों के अनुसार, इससे अल्पकालिक व्यापारिक व्यवधान हो सकते हैं। हालांकि, लंबे समय में भारतीय परिधान निर्यातकों को अतिरिक्त ऑर्डर हासिल करने के अवसर मिल सकते हैं।
पीडीएस लिमिटेड के ग्रुप सीईओ संजय जैन के अनुसार, बांग्लादेश में फैक्ट्रियों का कामकाज बाधित होने से भारतीय धागे और कपड़े के निर्यात पर अस्थायी असर पड़ सकता है। भारत के कुल सूती धागा निर्यात में बांग्लादेश की हिस्सेदारी लगभग 45% है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का बांग्लादेश को कुल निर्यात 10.58 अरब डॉलर रहा। इसमें सूती धागे, कपड़े और हथकरघा उत्पादों का योगदान लगभग 2 अरब डॉलर था। जैन ने कहा कि फैक्ट्रियों में व्यवधान से धागे की खरीद प्रभावित हो सकती है और भुगतान में देरी की आशंका बढ़ सकती है।
कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक सिद्धार्थ राजगोपाल ने कहा कि उद्योग अस्थायी व्यवधानों के बीच खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।
क्लॉथ मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सलाहकार राहुल मेहता के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर तुरंत दिखाई नहीं देता। मौजूदा विरोध-प्रदर्शन पिछले विरोधों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटे हैं। हालांकि, लगातार दूसरे विरोध-प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की चिंताएं बढ़ सकती हैं। भविष्य में खरीदार ऑर्डर देते समय श्रमिक अस्थिरता को ध्यान में रख सकते हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए अवसर
जैन के अनुसार, भारत में बांग्लादेशी कपड़ों के आयात पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना है। पिछले वर्ष जमीनी मार्ग से आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह व्यापार मार्ग पहले ही सीमित हो चुका है। हालांकि, बांग्लादेश से कपड़े आयात करने वाले ब्रांडेड रिटेलर्स को आपूर्ति में देरी हो सकती है।
क्रिसमस की आपूर्ति पर बड़े असर की संभावना कम है, क्योंकि पश्चिमी बाजारों के लिए छुट्टियों का अधिकांश स्टॉक शरद ऋतु की शुरुआत तक भेज दिया जाता है।
हालांकि, दोबारा दिए जाने वाले ऑर्डर और अगले सीजन के कारोबार पर असर पड़ सकता है। नवंबर से फरवरी के बीच बांग्लादेशी निर्माता अपने वार्षिक निर्यात ऑर्डर का लगभग 40% हिस्सा पक्का करते हैं। लंबे व्यवधान की स्थिति में खरीदार 2027 के वसंत-ग्रीष्मकालीन सीजन के ऑर्डर अन्य देशों की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे भारतीय कपड़ा एवं परिधान निर्यातकों को नए ऑर्डर हासिल करने के अवसर मिल सकते हैं।
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