वानी में कपास उत्पादन घटने की आशंका, नवंबर की शुरुआत में ही खत्म हो सकती है चुनाई
वानी (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के वानी तालुका में इस साल प्रतिकूल मौसम के कारण कपास की फसल प्रभावित हुई है। फसल की बढ़वार के महत्वपूर्ण चरण में बारिश की कमी और सिंचित क्षेत्रों में बीमारियों के प्रकोप से उत्पादन घटने की आशंका है। इसका असर कपास की चुनाई की अवधि पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर दिसंबर और जनवरी तक चलने वाली चुनाई इस बार नवंबर की शुरुआत में ही समाप्त होने की संभावना है। कम पैदावार और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
वानी तालुका में 42,768 हेक्टेयर में कपास की बुआई
वानी तालुका में बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका कपास की खेती पर निर्भर है। चालू खरीफ सीजन में यहां 42,768 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई की गई है। कई किसानों ने जून में ही बुआई पूरी कर ली थी। शुरुआती दौर में फसल का अंकुरण अच्छा रहने से किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी। हालांकि, जुलाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई। इसका असर फूल आने और टिंडे बनने की प्रक्रिया पर पड़ा, जिससे फसल की उत्पादन क्षमता कमजोर होने की आशंका है।
बारिश की कमी से असिंचित क्षेत्रों में नुकसान
इस साल मानसून की अनियमितता का सबसे अधिक असर असिंचित क्षेत्रों में देखने को मिला है। जुलाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी हो गई। पानी की कमी के कारण कपास के पौधों का विकास प्रभावित हुआ और टिंडों की संख्या कम रह गई। कई क्षेत्रों में पौधों के सूखने की स्थिति भी सामने आई है। इससे बारिश पर निर्भर किसानों को उत्पादन में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
सिंचित क्षेत्रों में भी बीमारियों का प्रकोप
सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में भी किसानों को राहत नहीं मिली है। मौसम में उतार-चढ़ाव और बारिश की अनियमितता के कारण कपास की फसल में लालिया रोग और विल्ट (पौधों के मुरझाने) की समस्या देखने को मिली है। इन समस्याओं से पौधों की बढ़वार और टिंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। फसल को बचाने के लिए किसानों ने कई बार कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों का छिड़काव किया, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
बढ़ती खेती लागत से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
कपास की खेती में किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक, छिड़काव और फसल की देखभाल पर काफी खर्च करना पड़ा है। बारिश की कमी और बीमारियों के कारण अतिरिक्त छिड़काव करना पड़ा, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई। दूसरी ओर, पौधों पर उम्मीद के मुताबिक टिंडे नहीं लगने से पैदावार घटने की आशंका है। ऐसे में बाजार में अच्छे भाव मिलने के बावजूद कम उत्पादन के कारण किसानों के लिए खेती की लागत निकालना मुश्किल हो सकता है।
नवंबर की शुरुआत में समाप्त हो सकती है कपास की चुनाई
आमतौर पर वानी तालुका में कपास की चुनाई दिसंबर और जनवरी तक जारी रहती है। लेकिन इस साल फसल की कमजोर स्थिति और टिंडों की कम संख्या के कारण चुनाई का सीजन नवंबर की शुरुआत में ही समाप्त होने की आशंका है। यदि ऐसा होता है, तो किसानों को सामान्य वर्षों की तुलना में कम अवधि तक कपास की उपज मिलेगी। कम पैदावार, बढ़ती उत्पादन लागत और समय से पहले समाप्त होते चुनाई सीजन ने वानी के कपास किसानों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है।
और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 26 पैसे मजबूत होकर 94.95 पर बंद हुआ।