नवाचार और वैल्यू एडिशन से आगे बढ़ रहा तमिलनाडु का टेक्सटाइल उद्योग
By yash chouhan 2026-06-13 13:18:42
तमिलनाडु टेक्सटाइल उद्योग वैल्यू एडिशन और नवाचार के जरिए बढ़ा रहा है प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
वैश्विक स्तर पर टैरिफ, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों के बावजूद तमिलनाडु का टेक्सटाइल उद्योग मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उद्योग अब केवल उत्पादन क्षमता पर निर्भर रहने के बजाय वैल्यू एडिशन, उत्पाद विविधीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के माध्यम से नई विकास संभावनाएं तलाश रहा है।
तमिलनाडु भारत के टेक्सटाइल सेक्टर का प्रमुख केंद्र है। राज्य में देश की 3,376 स्पिनिंग मिलों में से 1,861 मिलें स्थित हैं, जो कुल स्पिनिंग क्षमता का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा हैं। कोयंबटूर स्पिनिंग उद्योग का प्रमुख हब है, जबकि करूर होम टेक्सटाइल और इरोड वीविंग एवं प्रोसेसिंग गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
उद्योग जगत के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद टेक्सटाइल उत्पादों की मांग स्थिर बनी हुई है। इसी वजह से कई कंपनियां होम टेक्सटाइल, स्पेशलिटी यार्न और तकनीकी टेक्सटाइल जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। ऑर्गेनिक, रिसाइकिल्ड और वैकल्पिक फाइबर आधारित उत्पादों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कंपनियां अब बेहतर मार्जिन और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा के लिए विशेष उत्पादों पर फोकस कर रही हैं। पॉलिएस्टर-विस्कोस ब्लेंड, अल्ट्रा-फाइन फाइबर, प्रोटेक्टिव गारमेंट्स और मिलिट्री टेक्सटाइल जैसे सेगमेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई निर्माता हेम्प और केले के फाइबर जैसे वैकल्पिक कच्चे माल पर भी काम कर रहे हैं।
तिरुपुर और इरोड जैसे क्लस्टरों में भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। बाजार में अब छोटे प्रोडक्ट साइकिल, अधिक कस्टमाइजेशन और कम रिपीट ऑर्डर देखने को मिल रहे हैं, जिससे कंपनियां ऑर्डर-आधारित उत्पादन मॉडल की ओर बढ़ रही हैं।
साथ ही, कई निर्माता यार्न डाइंग, फैब्रिक प्रोसेसिंग, डिजिटल प्रिंटिंग और गारमेंटिंग सुविधाओं में निवेश कर वर्टिकल इंटीग्रेशन को मजबूत कर रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सफलता केवल बड़े पैमाने के उत्पादन से नहीं, बल्कि नवाचार, डिफरेंशिएशन और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने की क्षमता से तय होगी।