जाब में कपास की खेती घटकर 80,000 हेक्टेयर हुई; छह साल में देश का उत्पादन भी गिरा

By jayesh chouhan 2026-07-27 12:36:55
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पंजाब में कपास की खेती 80,000 हेक्टेयर तक सिमटी, छह साल में देशभर में उत्पादन में गिरावट

बठिंडा: पंजाब में कपास की खेती लगातार घट रही है और वर्ष 2026-27 के सीजन में इसका रकबा घटकर लगभग 80,000 हेक्टेयर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। राज्यसभा में सांसद प्रमोद तिवारी के सवाल के जवाब में केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि देशभर में भी पिछले छह वर्षों के दौरान कपास के रकबे और उत्पादन में लगातार गिरावट आई है।

कपास उत्पादन और खपत पर गठित समिति की अप्रैल 2026 की बैठक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की खेती का कुल क्षेत्रफल 2020-21 में 132.85 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में घटकर 114.82 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी अवधि में कपास उत्पादन 352.48 लाख गांठों से कम होकर 290.91 लाख गांठों तक पहुंच गया। एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम होता है।

राष्ट्रीय स्तर पर कपास की उत्पादकता में भी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में प्रति हेक्टेयर 451 किलोग्राम कपास उत्पादन होता था, जो 2025-26 में घटकर 431 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया। हालांकि, 2022-23 में उत्पादकता 443 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के स्तर तक पहुंची थी।

पंजाब में गिरावट ज्यादा तेज रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य में कपास का रकबा 1.19 लाख हेक्टेयर था, जो 2026-27 में घटकर केवल 80,000 हेक्टेयर रह गया। राज्य सरकार ने कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया था, लेकिन किसान इस लक्ष्य का करीब 64 प्रतिशत ही हासिल कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर आमदनी देने वाली अन्य फसलों की ओर किसानों का रुख बढ़ने से कपास का क्षेत्र लगातार कम हो रहा है।

कपास उत्पादन में कमी का असर कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। घरेलू उद्योग की मांग पूरी करने के लिए कच्चे कपास के आयात में भारी वृद्धि हुई है। 2024-25 में जहां 5,62,224 टन कच्चे कपास का आयात हुआ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 10,13,455 टन हो गया।

केंद्रीय मंत्री ने उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण भूमि उपयोग में बदलाव और किसानों का वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ना बताया। उन्होंने कहा कि सरकार कपड़ा उद्योग को समर्थन देने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें कच्चे कपास के आयात पर 1 जून से 31 अक्टूबर तक 11 प्रतिशत आयात शुल्क में छूट और बेहतर गुणवत्ता वाले एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन के आयात पर शुल्क छूट जारी रखना शामिल है।


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