महाराष्ट्र : अकोला में कपास के बीज और डीएपी खाद की किल्लत, किसानों की तैयारियों पर 'ब्रेक'?

By yash chouhan 2025-06-11 18:20:39
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आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण अकोला कपास सीजन में देरी

खरीफ सीजन : खरीफ की बुआई का मौसम नजदीक आने के साथ ही अकोला जिले में किसानों को डीएपी खाद के साथ ही कपास के बीज की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मांग के मुकाबले आपूर्ति काफी कम होने से किसान असमंजस में हैं। अगर स्टॉक समय पर उपलब्ध नहीं हुआ तो बुआई में देरी और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। (खरीफ सीजन)

खरीफ सीजन की बुआई का समय नजदीक आने के साथ ही जिले में सबसे ज्यादा मांग वाले कपास के बीज और 'डीएपी' खाद की कमी हो रही है। यह स्थिति हजारों किसानों की तैयारी में बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही है। (खरीफ सीजन)

बीज और खाद के अपर्याप्त स्टॉक के कारण खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। अगर सरकार और खाद निर्माता कंपनियां समय पर मांग को पूरा नहीं करती हैं तो बुआई में देरी होने की संभावना है। इसका असर आगामी सीजन में उत्पादन, बाजार मूल्य और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है। (खरीफ सीजन)

बीज और उर्वरक स्टॉक की मौजूदा स्थिति

कपास के बीज की मांग: 3 लाख पैकेट

उपलब्धता (7 जून तक): केवल 1,12,000 पैकेट

वर्तमान में उपलब्ध: केवल 1,000 पैकेट

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बीज स्टॉक कब उपलब्ध होगा। क्या मांग के अनुसार स्टॉक उपलब्ध होने तक बुवाई की तारीख को स्थगित करना पड़ेगा? इससे स्थानीय किसान चिंतित हैं।

'डीएपी' उर्वरक आपूर्ति की स्थिति

मांग: 25 हजार मीट्रिक टन

उपलब्धता (वर्तमान): 4 हजार मीट्रिक टन

वर्तमान प्रत्यक्ष स्टॉक: केवल 1,300 मीट्रिक टन

क्या किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी?

* देरी से बुआई का जोखिम

* कपास उत्पादन पर प्रभाव

* कालाबाजारी का संभावित जोखिम

* कम उत्पादन के कारण आर्थिक प्रभाव

जिले में सबसे अधिक मांग वाले कपास के बीज और डीएपी उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृषि आयुक्तालय के साथ-साथ संबंधित कंपनी के साथ अनुवर्ती कार्रवाई की जा रही है।


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