गुजरात (भुज): मानसून से पहले खेती की तैयारियां तेज, सिंचित क्षेत्रों में कपास की बुवाई शुरू
मानसून की आधिकारिक शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में कच्छ जिले के किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने कपास की बुवाई शुरू कर दी है, जबकि वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान खेतों की जुताई और भूमि तैयार करने का काम पूरा कर चुके हैं। अब सभी की निगाहें समय पर होने वाली मानसूनी बारिश पर टिकी हैं।
कच्छ अपनी भौगोलिक विषमताओं और अपेक्षाकृत कम वर्षा के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद जिले में मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। यहां मुख्य रूप से ऐसी फसलों की बुवाई होती है जो स्थानीय मिट्टी और अनिश्चित जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों।
जिले में मूंगफली और कपास जैसी नकदी फसलों के अलावा ग्वार, बाजरा, ज्वार और अरंडी की भी व्यापक खेती की जाती है। साथ ही, कम अवधि वाली दलहनी फसलें—मूंग, मोठ और उड़द—भी किसानों की पसंद हैं, क्योंकि ये मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती हैं।
मानसून की प्रतीक्षा के बीच भुज, अंजार, भचाऊ, नखत्राणा और मांडवी के कृषि बाजारों में रौनक बढ़ गई है। किसान सरकारी डिपो और निजी विक्रेताओं से उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और फसल सुरक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं, जिससे आगामी बुवाई सीजन के प्रति उनका उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस वर्ष मानसून समय पर पहुंचता है और वर्षा का वितरण संतुलित रहता है, तो कच्छ में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से आगे बढ़ेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहेगी।