भारत ने वस्त्र और इस्पात क्षेत्र में अधिक उत्पादन क्षमता के अमेरिकी आरोपों को खारिज किया
By jayesh chouhan 2026-06-11 12:31:33
US की 'सेक्शन 301' जांच में भारत ने टेक्सटाइल और स्टील क्षेत्र में ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज किया
भारत ने अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 'सेक्शन 301' जांच के तहत लगाए गए उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि देश के टेक्सटाइल और स्टील क्षेत्रों में जरूरत से अधिक उत्पादन क्षमता (ओवरकैपेसिटी) मौजूद है।
रॉयटर्स के अनुसार, अतिरिक्त व्यापार सचिव अमिताभ कुमार ने बुधवार को कहा कि भारत में इन उद्योगों की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग के अनुरूप है और इसे देश की बड़ी आबादी तथा बढ़ती खपत की आवश्यकताओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आधार पर भारत का उत्पादन और खपत स्तर कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी काफी कम है।
अमेरिका ने अपनी जांच में भारत के सोलर उपकरण, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कथित संरचनात्मक ओवरकैपेसिटी का मुद्दा उठाया है। साथ ही, अमेरिका के साथ भारत के लगभग 42 अरब डॉलर के व्यापार अधिशेष का भी उल्लेख किया गया है।
इस बीच, टेक्सटाइल निर्यात संवर्धन परिषद (TEXPROCIL) ने भी अमेरिकी दावों का विरोध करते हुए USTR को विस्तृत जवाब सौंपा है। उद्योग संगठन का कहना है कि कॉटन, यार्न और फैब्रिक सेगमेंट के उत्पादन आंकड़े किसी असामान्य क्षमता विस्तार की ओर संकेत नहीं करते। इसके विपरीत, कई क्षेत्रों में उत्पादन स्थिर रहा है या उसमें गिरावट दर्ज की गई है, जिससे संरचनात्मक ओवर-सप्लाई के आरोप कमजोर पड़ते हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने भी प्रभावित उद्योगों की ओर से अपना पक्ष रखते हुए ओवरकैपेसिटी और भारतीय कॉटन टेक्सटाइल क्षेत्र में जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े आरोपों को खारिज किया है।
गौरतलब है कि USTR की यह जांच इस बात की समीक्षा के लिए शुरू की गई है कि क्या विभिन्न देश सब्सिडी, श्रम लागत या अन्य नीतिगत उपायों के माध्यम से ऐसे विनिर्माण लाभ पैदा कर रहे हैं, जो वैश्विक व्यापार में असंतुलन उत्पन्न कर सकते हैं। जांच के दायरे में टेक्सटाइल और स्टील के अलावा पेट्रोकेमिकल्स, स्वास्थ्य उत्पाद और ऑटोमोटिव क्षेत्र भी शामिल हैं।