भारत फिर से वैश्विक कपड़ा व्यापार में नेतृत्व हासिल करने की राह पर

By jayesh chouhan 2026-07-21 12:51:24
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कभी टेक्सटाइल व्यापार में भारत का दबदबा था, अब वैश्विक पहचान फिर बनाने की चुनौती

नई दिल्ली: कभी भारत दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल व्यापारिक केंद्रों में शामिल था। आज देश के पास कपास उत्पादन से लेकर कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, परिधान निर्माण और निर्यात तक टेक्सटाइल की पूरी वैल्यू चेन मौजूद है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी रोजगार पैदा करने की क्षमता है। हालांकि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भारत को मजबूत संस्थानों, आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है।

बहुत कम उद्योगों ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर टेक्सटाइल उद्योग जितना गहरा प्रभाव डाला है। ग्लोबल वैल्यू चेन की आधुनिक अवधारणा के सामने आने से हजारों वर्ष पहले ही कपड़ा निर्माण भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक ताने-बाने का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था।

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में हुई खुदाई से तकली, सुई और कपड़ा निर्माण तथा रंगाई से जुड़ी वस्तुओं के प्रमाण मिले हैं। ये भारत में टेक्सटाइल गतिविधियों के शुरुआती प्रमाणों में शामिल हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में विकसित हुई यह परंपरा बाद की सदियों में व्यापार, नवाचार और उत्कृष्ट कारीगरी के माध्यम से आगे बढ़ती रही।

लगभग दो हजार वर्षों तक भारतीय कपड़ों की एशिया और यूरोप के बाजारों में मजबूत मांग रही। मुगल काल के दौरान बंगाल सूती टेक्सटाइल उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। ढाका की महीन मलमल अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी काफी मांग थी। वहीं, मुर्शिदाबाद रेशम और अन्य उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्रों के व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा।

अर्थशास्त्री एंगस मैडिसन के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 1700 में वैश्विक आर्थिक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई थी। इसके बाद औद्योगिक क्रांति ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल दिया। जेम्स हारग्रीव्स की स्पिनिंग जेनी और बुनाई से जुड़ी अन्य मशीनों ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया। प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अब केवल कारीगरों के कौशल पर निर्भर नहीं रही, बल्कि तकनीक, उत्पादकता और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर आधारित हो गई।

इस बदलाव के बाद भारत धीरे-धीरे ब्रिटेन के लंकाशायर क्षेत्र की मिलों के लिए कच्चे कपास का प्रमुख आपूर्तिकर्ता और तैयार कपड़ों के लिए एक बड़ा बाजार बन गया।

आज भारत के सामने चुनौती केवल अपने गौरवशाली टेक्सटाइल अतीत को दोहराने की नहीं, बल्कि आधुनिक वैश्विक टेक्सटाइल शक्ति के रूप में अपनी नई पहचान बनाने की है। इसके लिए मजबूत संस्थानों, आधुनिक तकनीक, नवाचार, कुशल कार्यबल और पूरी वैल्यू चेन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।


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