भारत दिसंबर 2026 तक बढ़ा सकता है कपास का शुल्क-मुक्त आयात, टेक्सटाइल मिलों को राहत की उम्मीद
भारत सरकार कपास के शुल्क-मुक्त आयात की अवधि दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर सकती है। तीन सरकारी और उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस कदम से टेक्सटाइल मिलों की उत्पादन लागत कम करने, घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया से कपास के आयात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक भारत ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास पर लगने वाला 11% आयात शुल्क हटा दिया था। हालांकि, इस साल संभावित कम पैदावार के कारण घरेलू कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में टेक्सटाइल उद्योग आयात शुल्क में दी गई छूट को आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है।
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा पूरी होने के बाद सरकार जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी कर सकती है। प्रस्ताव के तहत शुल्क-मुक्त आयात की सुविधा कम से कम दिसंबर के अंत तक बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वित्त, वाणिज्य और कपड़ा मंत्रालयों ने टिप्पणी के अनुरोधों का तत्काल जवाब नहीं दिया।
आमतौर पर अक्टूबर में नई फसल की आवक शुरू होने से घरेलू कपास की कीमतों में नरमी आती है। लेकिन इस साल मानसून की अनियमित बारिश और उत्पादन में संभावित गिरावट के कारण कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू बाजार में कपास का भाव 9,000 रुपये प्रति 100 किलोग्राम से ऊपर है, जबकि नए सीजन के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,717 रुपये बताया गया है।
S&P ग्लोबल की प्रधान विश्लेषक दीपांशी अग्रवाल के अनुसार, घरेलू उत्पादन में संभावित कमी, टेक्सटाइल उद्योग की मजबूत मांग और स्टॉक-टू-यूज अनुपात में गिरावट शुल्क-मुक्त आयात की अवधि बढ़ाने के पक्ष में हैं। यह अनुपात लगभग 31% रहने का अनुमान है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया गया है। हालांकि, अतिरिक्त आयात से घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन 29 मिलियन गांठों से नीचे रह सकता है, जबकि मांग 34 मिलियन गांठों से अधिक रहने की संभावना है। पुराने आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) बीजों के इस्तेमाल और कीटों के खतरे से भी उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, अमेरिकी कपास वायदा कीमतों का 83 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर रहना, बढ़ती माल ढुलाई लागत और रुपये की कमजोरी बड़े पैमाने पर आयात को सीमित कर सकती है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में भारत का कपास आयात सालाना आधार पर 63% बढ़कर 1.1 अरब डॉलर हो गया। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने आयात शुल्क को लंबे समय तक हटाए रखने की मांग की है। उनके अनुसार, इससे निर्माताओं की लागत घटेगी और भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वियतनाम तथा बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
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