ICAR-SBI 2030 तक पिंक बॉलवर्म-रोधी नए जीन वाली कपास के बीज करेगा व्यावसायिक
By jayesh chouhan 2026-07-17 13:06:10
पिंक बॉलवर्म से लड़ने वाले नए जीन को व्यावसायिक रूप देने की तैयारी में ICAR-SBI
कोयंबटूर स्थित ICAR-शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट (ICAR-SBI) ने पिंक बॉलवर्म के खिलाफ प्रभावी नए क्रिस्टल टॉक्सिन जीन की खोज के बाद इसे व्यावसायिक रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत वर्ष 2030 तक ट्रांसजेनिक कॉटन हाइब्रिड विकसित कर किसानों के लिए व्यावसायिक बीज उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है।
पिंक बॉलवर्म भारत में बोलगार्ड II (Bollgard II) कपास की खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसे देखते हुए, कपास उत्पादन बढ़ाने और खेती के रकबे में गिरावट रोकने के उद्देश्य से ICAR-SBI के वैज्ञानिकों ने 15 वर्षों से अधिक के शोध के बाद बैसिलस थुरिंगिएंसिस (Bacillus thuringiensis) के नए क्रिस्टल टॉक्सिन जीन को सफलतापूर्वक अलग किया है।
संस्थान के निदेशक पी. गोविंदराज ने बताया कि खोजे गए नए जीनों में से एक पिंक बॉलवर्म की उन आबादियों के खिलाफ भी प्रभावी पाया गया है, जिन्होंने बोलगार्ड II तकनीक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। उनका कहना है कि यह खोज भविष्य में अधिक टिकाऊ और कीट-प्रतिरोधी कपास किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक बी. सिंगरावेलु ने कहा कि इस हाई-वैल्यू तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की जाएगी, ताकि शोध को तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सके।
इसी दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में नई दिल्ली में ICAR-SBI और रासी सीड्स के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। इस साझेदारी का उद्देश्य नई तकनीक पर आधारित ट्रांसजेनिक कपास हाइब्रिड विकसित कर उसे व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध कराना है।