एक्स-जिन कपास ₹4,000 महंगी, तमिलनाडु की 1,500 से अधिक मिलों की चिंता बढ़ी
By yash chouhan 2026-10-23 12:47:15
कपास की एक्स-जिन कीमतों में ₹4,000 प्रति कैंडी की तेजी, तमिलनाडु की 1,500 से अधिक टेक्सटाइल मिलों की बढ़ी चिंता
तमिलनाडु: देश में कपास मार्केटिंग सीजन 2026-27 की शुरुआत के बाद कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। पिछले 10 दिनों के दौरान एक्स-जिन (Ex-Gin) आधार पर कपास के भाव ₹64,000 से बढ़कर ₹68,000 प्रति कैंडी पहुंच गए हैं। लगभग 6.25 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी से तमिलनाडु की 1,500 से अधिक टेक्सटाइल मिलों में उत्पादन लागत बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कपास की सीमित आवक से बाजार में तेजी
इंडियन कॉटन फेडरेशन के सचिव निशांत अशर के अनुसार, बाजार में नई कपास की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। अक्टूबर में कीमतों में इतनी तेजी को असामान्य माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्पादन में संभावित कमी, बेहतर कीमतों की उम्मीद में कुछ किसानों द्वारा कपास की बिक्री रोकना और 1 नवंबर से आयात शुल्क दोबारा लागू होने की संभावना जैसे कारक कीमतों में तेजी के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
मांग के मुकाबले उत्पादन कम रहने का अनुमान
सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन दुरई पलानीस्वामी के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुए कपास सीजन 2025-26 में देश की घरेलू खपत 336 लाख गांठ रही। इस दौरान 67 लाख गांठ कपास का आयात हुआ, जबकि सीजन के अंत में लगभग 40 लाख गांठ का स्टॉक बचा।
उन्होंने बताया कि चालू सीजन में कपास की मांग 360 लाख गांठ और उत्पादन लगभग 260 लाख गांठ रहने का अनुमान है। ऐसे में मांग और उत्पादन के बीच अंतर से कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
आयात शुल्क से टेक्सटाइल उद्योग की लागत बढ़ने की आशंका
पलानीस्वामी के अनुसार, कपास की ऊंची कीमतों से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। हालांकि, आयात शुल्क दोबारा लागू होने की स्थिति में टेक्सटाइल मिलों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने सरकार से किसानों और टेक्सटाइल उद्योग, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाने की आवश्यकता जताई