मजदूर कमी के बावजूद कपास लक्ष्य बढ़ा

By shruti 2026-02-28 12:18:58
First slide


कीटों की आशंका, मजदूरों की कमी के बीच पंजाब ने कपास का लक्ष्य बढ़ाया


अप्रैल में कपास की बुआई का मौसम शुरू होते ही पंजाब के कपास क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बन जाता है। किसान और कृषि विशेषज्ञ कीट-प्रवण संकर बीजों, विशेषकर गुलाबी बॉलवर्म के खतरे, तथा कृषि श्रमिकों की भारी कमी को लेकर चिंतित हैं। इन चुनौतियों के बावजूद राज्य कृषि विभाग ने 2025-26 के खरीफ सीजन के लिए 1.5 लाख हेक्टेयर में कपास बोने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले सीजन से लगभग 30,000 हेक्टेयर अधिक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में राज्य में 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हुई थी, जिसके बाद रकबे में लगातार गिरावट आई है।


पंजाब के अर्ध-शुष्क दक्षिणी जिलों में कपास की चुनाई का कार्य मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाता है। हालांकि, फसल उत्पादन में गिरावट और लगातार नुकसान के चलते खेतों में काम कम हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में कृषि मजदूर अन्य रोजगारों की ओर मुड़ गए हैं। कई श्रमिक अब गैर-कृषि गतिविधियों या ग्रामीण रोजगार योजनाओं के तहत काम करना अधिक सुरक्षित और स्थिर विकल्प मानते हैं।


बठिंडा जिले के बाजक गांव के किसान बलदेव सिंह का कहना है कि 2021 के बाद से कीटों के हमले और प्रतिकूल मौसम के कारण फसलें लगातार खराब हो रही हैं। ऐसे में ‘सिरी’ कहे जाने वाले कृषि श्रमिकों की उपलब्धता घट गई है। मजदूर कम श्रम-गहन और अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले कार्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे कपास उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

फाजिल्का जिले के किसान गुरजीत सिंह रोमाना के अनुसार, लगातार पांच सीजन की खराब फसल के बाद किसान दोबारा जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बीटी-2 कपास के बीज गुलाबी बॉलवर्म के प्रति संवेदनशील हैं और अब तक किसानों को यह भरोसा नहीं दिलाया गया है कि नई फसल सुरक्षित रहेगी। अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में विकल्प सीमित होने के बावजूद किसान संशय में हैं और कपास का रकबा बढ़ाने से हिचक रहे हैं।

राज्य के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने स्वीकार किया कि कपास बेल्ट में श्रमिकों की कमी पिछले दो-तीन वर्षों में गंभीर रूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि विभाग मशीनीकरण को बढ़ावा देने और बुआई से पहले खेतों की सफाई जैसे कदम उठा रहा है। बराड़ के अनुसार, समस्या की जड़ कीटों के प्रति संवेदनशील बीज हैं। गुलाबी बॉलवर्म-प्रतिरोधी नई पीढ़ी के बीज अभी परीक्षण चरण में हैं और उनकी स्वीकृति में समय लगेगा। फिलहाल विभाग की टीमें विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप किसानों को कपास की खेती के लिए प्रेरित करने में जुटी हैं।

और पढ़ें:-  CCI साप्ताहिक बिक्री: 8.65 लाख गांठें बिकीं, कीमतों में उतार-चढ़ाव


Regards
Team Sis
Any query plz call 9111677775

https://wa.me/919111677775

Videos

Copyright© 2023 | Smart Info Service
Application Download