कपास 10,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार, फिर भी किसानों को नहीं मिला लाभ
पुराने आदिलाबाद ज़िले में कपास की कीमतें बढ़कर 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गई हैं, लेकिन अधिकांश किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पाया। वजह यह रही कि किसानों ने अपनी फसल पहले ही कम दामों पर बेच दी थी। किसानों ने बाजार की अस्थिरता और नमी से जुड़ी खरीद शर्तों को अपने नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया।
आदिलाबाद में इस बार कपास की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। इसके बावजूद किसानों में उत्साह नजर नहीं आया, क्योंकि ज्यादातर किसान अपनी उपज पहले ही बेच चुके थे। केवल कुछ किसान, जिन्होंने अपनी कपास को घरों में सुरक्षित रखा था, अब बढ़ी हुई कीमतों का लाभ उठाकर मुनाफा कमा रहे हैं।
कई किसानों का कहना है कि कपास बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा, जिससे उन्हें सही समय पर उचित दाम नहीं मिल सके। नतीजतन, बड़ी संख्या में किसानों को इस नकदी फसल की खेती में नुकसान उठाना पड़ा।
पुराना आदिलाबाद ज़िला — जिसमें आदिलाबाद, मंचेरियल, कुमराम भीम आसिफाबाद और निर्मल जिले शामिल हैं — राज्य के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। इस क्षेत्र में करीब 12.60 लाख एकड़ में कपास की खेती की गई थी और अनुमानित उत्पादन 80 लाख क्विंटल रहा।
भारतीय कपास निगम (CCI) ने लगभग 40.25 लाख क्विंटल कपास की खरीद की, जबकि शेष उपज निजी व्यापारियों द्वारा खरीदी गई।